लद्दाख: ईरान की मदद के लिए आगे आए मासूम बच्चे, किसी ने दी अपनी साइकिल तो कोई ले आया अपने खिलौने; नन्ही से बच्ची ने 'गुल्लक' तोड़ दिया दान
ईरान के युद्ध प्रभावित नागरिकों की मदद के लिए भारत के लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में आम लोग बढ चढ़कर आगे आ रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चे अपनी 'गुल्लक' तोड़कर ईरान को दान दे रहे हैं।
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मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच कई देश ईरान की मदद के लिए लगातार आगे आ रहे हैं। भारत के भी कई राज्यों के लोगों ने मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में मासूम बच्चों ने दरियादिली दिखाई है और युद्ध प्रभावित नागरिकों की मदद के लिए अपनी बेशकीमती चीजों को दान में दे दिया है। इस मुहिम में सबसे दिल छू लेने वाली घटना एक छोटी बच्ची की है, जिसने अपनी गुल्लक तोड़कर राहत कार्यों में योगदान दिया है।
ईरान के युद्ध प्रभावित नागरिकों की मदद के लिए भारत के लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में जनता का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। यहां आम लोग न सिर्फ नकदी, बल्कि सोना-चांदी के गहने, घरेलू बर्तन, बच्चों की साइकिलें और यहां तक कि पशु भी दान कर रहे हैं। कश्मीर और ईरान के बीच अपने ऐतिहासिक संबंधों को फिर से मजबूत करते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सभी संप्रदायों के लोग ईरान के लोगों की मदद के लिए दिल खोलकर दान दे रहे हैं।
बच्चों ने दान में क्या-क्या दिया?
ईरान पर US-इजराइल के हमलों से प्रभावित लोगों की मदद के लिए लेह में रेगुलर डोनेशन ड्राइव चल रही हैं, जिसमें पैसे, कीमती मेटल की ज्वेलरी और कीमती सामान शामिल हैं। इसी बीच, एक छोटी लड़की ने राहत के काम में मदद करने के लिए अपना 'गुल्लक' (गुल्लक) तोड़ दिया। दान की गई चीजों में कई बच्चों की साइकिलें भी देखी जा सकती थीं।
ईरान के मदद के लिए मुहिम
लद्दाख के लोग पिछले करीब 30 दिनों से अमेरिका-इजरायल के हमलों से प्रभावित ईरान के लोगों के लिए लगातार दान अभियान चला रहे हैं। रामबन जिले के चंदरकोट इलाके में शिया समुदाय के सैकड़ों लोगों ने इमामबाड़ा में इकट्ठा होकर सामूहिक दान मुहिम चलाई। यहां लोगों ने पैसे, बर्तन, सोना-चांदी के गहने दान किए। महिलाओं ने अपने गहने, बच्चों की चूड़ियां और बालियां उतारकर दान कर दीं। बच्चों ने अपनी गुल्लकें तोड़ दीं। एक व्यक्ति ने तो अपनी भेड़ भी दान कर दी।
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मदद के लिए ईरान ने जताया आभार
वहीं, भारत के छोटे-छोटे बच्चों की इस मुहिम पर ईरान ने आभार जताया था। ईरानी दूतावास ने 22 मार्च को भारतीयों की सराहना करते हुए कहा था, "भारत के लोगों की दयालुता और इंसानियत को हम कभी नहीं भूलेंगे।" दूतावास ने ईरान के पुनर्निर्माण के लिए पैसे और गहने दान करने वाले सभी भारतीयों को धन्यवाद दिया और उनके प्रेम को हमेशा याद रखने का भरोसा जताया।