बेटे के लिए इंसाफ मांग रहा, केतन कभी वापस नहीं आ सकता, मगर...पिता विशाल अग्रवाल ने लिखी राष्ट्रपति को भावुक चिट्ठी, सिया के लिए की ये मांग
केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने न्याय की मांग को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक भावुक ई-मेल भेजा है। उन्होंने राष्ट्रपति से मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।
- भारत
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पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच जारी है। न्याय की लड़ाई अब देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच चुकी है। केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने अब न्याय की गुहार लगाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ई-मेल भेजा है। उन्होंने राष्ट्रपति से मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। विशाल ने अपने ईमेल में लिखा है कि उनके पास अब खोने के कुछ नहीं है, बस न्याय की उम्मीद है।
न्याय की मांग को लेकर केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भावुक ई-मेल भेजा है। उन्होंने मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने, दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा दिलाने और मामले में शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने की अपील की है।
मैं अपने बेटे के लिए इंसाफ मांग रहा हूं-विशाल अग्रवाल
राष्ट्रपति को लिखे ई-मेल और पत्र में विशाल अग्रवाल ने कहा कि वह यह ई-मेल किसी व्यवसायी या प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे पिता के रूप में लिख रहे हैं जिसने अपने बेटे को खो दिया है। उन्होंने लिखा, "मैं सिर्फ एक बाप हूं, जो अपने बेटे के लिए इंसाफ मांग रहा है।" उन्होंने आगे लिखा है, उनके बेटे केतन की बेरहमी से हत्या कर दी गई और उस घटना के बाद से उनके परिवार का जीवन पूरी तरह बदल गया है। उन्होंने लिखा कि हर सुबह उनका परिवार उसी दर्द के साथ उठता है और हर रात एक ही सवाल मन में रहता है कि आखिर केतन को न्याय कब मिलेगा।
विशाल अग्रवाल ने अपने परिवार पर टूटे दुखों का जिक्र करते हुए लिखा कि बेटे की मौत के महज 20 दिनों के भीतर उन्होंने अपने पिता को भी खो दिया। उनके अनुसार, उनके पिता अपने पोते केतन से बेहद प्यार करते थे और उसकी मौत का सदमा सहन नहीं कर सके। उन्होंने लिखा कि लगातार सदमे और मानसिक पीड़ा के कारण उनका ब्लड प्रेशर गिर गया और अंततः उनका दिल काम करना बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ 20 दिनों के भीतर उन्होंने अपने बेटे और अपने पिता, दोनों को खो दिया, जिससे पूरा परिवार बिखर गया।
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मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की मांग
पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका परिवार किसी विशेष सुविधा, रियायत या विशेष व्यवहार की मांग नहीं कर रहा है। उनकी केवल यही मांग है कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो ताकि जल्द से जल्द न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि इस जघन्य अपराध के दोषियों को कानून के तहत सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए और न्याय में होने वाली देरी पीड़ित परिवार की पीड़ा को और बढ़ा देती है।
भारी मने से विशाल अग्रवाल ने आगे लिखा है, केतन अब कभी वापस नहीं आ सकता, लेकिन दोषियों को यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि वे कानून की प्रक्रिया में देरी कर या उससे बचकर निकल सकते हैं। उनके मुताबिक, दोषियों को कड़ी सजा मिलने से न केवल उनके परिवार को कुछ मानसिक शांति मिलेगी, बल्कि पूरे समाज में यह संदेश जाएगा कि निर्दोष लोगों की जान की कीमत है और ऐसे अपराध किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
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राष्ट्रपति से की ये भावुक अपील
राष्ट्रपति से भावुक अपील करते हुए विशाल अग्रवाल ने लिखा कि वह हाथ जोड़कर अनुरोध करते हैं कि इस मामले पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान दिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि उनके बेटे को जल्द से जल्द न्याय मिले। उन्होंने कहा कि उनका परिवार पहले ही सब कुछ खो चुका है और अब उनके पास केवल एक ही उम्मीद बची है, इंसाफ।
अपने पत्र के अंत में उन्होंने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि उनके बेटे के मामले को केवल एक और सरकारी फाइल बनकर न रहने दिया जाए। उन्होंने लिखा कि इस केस के पीछे एक ऐसा परिवार है जिसने अपना सब कुछ खो दिया है और अब उसे केवल न्याय का इंतजार है।