Vijay Rally Stampede: 'भाई के बेटे की मौत हो गई, मेरे बच्चे की...', पीड़ित ने रो-रोकर सुनाई आपबीती, चश्मदीदों ने बताया आंखों देखा हाल
Karur Vijay Rally Stampede news: करूर में एक्टर विजय की रैली में हुए भगदड़ हादसे में 39 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। हादसे में अपनों को खोने वाले पीड़ित ने अपना दर्द साझा किया है। साथ ही चश्मदीदों ने भी बताया कि भगदड़ के समय वहां कैसे हालात थे?
- भारत
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Karur Vijay Rally Stampede: तमिलनाडु के करूर में एक्टर विजय की चुनावी रैली बड़ी त्रासदी में बदल गई। रैली में अचानक भगदड़ मच गई, जिसमें 39 लोगों की दर्दनाक मौत हुई है। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। घटना में 50 से ज्यादा लोग घायल भी हुए। इस बीच घटना का शिकार हुए एक पीड़ित का झकझोर देने वाला बयान सामने आया है। वो रोते-रोते अपना दर्द साझा करते नजर आ रहा है।
पीड़ित ने बयां किया दर्द
पीड़ित से मीडिया को बताया, "मेरे भाई के 2 बेटे हैं। बड़े बेटे की मौत हो गई। छोटा बेटा कहां है, हमे नहीं पता। भाई की पत्नी ICU में एडमिट है।" वे फूट-फूटकर रोते हुए कहता हैं कि मुझे नहीं पता क्या करुं? मेरे बेटे की आंख में चोट लगी है। अंधा हो जाएगा वो।"
रोते-बिखलते नजर आए परिजन
ऐसा ही हाल उन सभी लोगों का है, जिन्होंने इस हादसे में अपनों को खोया है। परिजन बुरी तरह से रोते-बिलखते नजर आ रहे हैं।
चश्मदीदों ने बताया आंखों देखा हाल
ये हादसा कैसे हुआ, इसको लेकर अलग-अलग थ्योरी सामने आ रही है। भगदड़ के समय घटनास्थल पर मौजूद कई चश्मदीदों और पीड़ितों के बयान भी सामने आए हैं, जिन्होंने भयावह मंजर का आंखों देखा हाल बताया है।
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नंद कुमार नाम के एक चश्मदीद ने इस हादसे को गंभीर चूक बताया। उन्होंने कहा, "हम खुद वहां मौजूद थे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कुछ नहीं किया जा सका। उन्होंने (विजय) कहा था कि वे सुबह 11 बजे तक करूर पहुंच जाएँगे और सभी को इसकी सूचना भी दे दी गई थी। जब वे पहुंचे, तो बहुत देर हो चुकी थी।"
शख्स ने इस तरह की घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह समझना मुश्किल है कि गलती किसकी है। लोग उनके समय पर पहुंचने की उम्मीद में आए थे। कई लोग बच्चों के साथ थे, वे भूखे थे या मुश्किल हालात का सामना कर रहे थे। हर कोई किसी स्टार को देखने के उत्साह से आया था। यह बेहद दुखद है। यह एक बहुत ही दुखद घटना थी। अगर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए भी गए होते, अगर उम्मीद से दस-पंद्रह गुना ज्यादा लोग आ जाए, तो कोई क्या कर सकता था? यह एक गंभीर चूक थी। इस तरह के आयोजनों की योजना सावधानीपूर्वक बनाई जानी चाहिए।
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सूर्या नाम के एक और चश्मदीद ने बताया कि भीड़ इतनी ज्यादा थी कि एम्बुलेंस अंदर नहीं जा पा रही थी। लोगों के खड़े होने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं थी। लोगों को बाहर निकालने में बहुत लंबा समय लगा।