Kailash Mansarovar Yatra: श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी, 4 साल बाद फिर से शुरू होगी यात्रा, विदेश मंत्रालय से आया बड़ा अपडेट
Kailash Mansarovar Yatra: भारत-चीन के सुधरते संबंधों के बीच श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है। कैलाश मानसरोवर की यात्रा 4 साल बाद फिर से शुरू होगी।
- भारत
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Kailash Mansarovar Yatra: भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार के अपडेट्स सामने आ रहे हैं। सीमा विवाद की वजह से दोनों देशों ने एक दूसरे पर कई प्रतिबंध लगाए, जिसे एक-एक कर हटाया जा रहा है। इस बीच मानसरोवर की यात्रा को लेकर भी बड़ा अपडेट सामने आया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू होने को लेकर बड़ी जानकारी साझा की है।
बता दें, कोरोना महामारी के दौरान से कैलाश मानसरोवर यात्रा स्थगित है। यानि कि 2020 से चीन स्थिति मानसरोवर की यात्रा नहीं हो रही है। ऐसे में यहां जाने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए ये बड़ी खुशखबरी है। मानसरोवर की इस यात्रा में हिंदू, जैन और बुद्ध धर्मों के अनुयायी शामिल होते हैं।
इस साल होगी मानसरोवर की यात्रा
कोविड-19 महामारी के बाद से कैलाश मानसरोवर यात्रा स्थगित है। हालांकि इसे लेकर भी एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने कहा, “कैलाश मानसरोवर यात्रा इस साल होगी और हम तैयारी कर रहे हैं। हम जल्द ही कैलाश मानसरोवर यात्रा के बारे में एक सार्वजनिक नोटिस जारी करेंगे। यात्रा के जल्द ही फिर से शुरू होने की संभावना है।”
आतंक के केंद्र के रूप में पाक की प्रतिष्ठा...: MEA
वहीं 26/11 मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लाख कोशिश कर ले, लेकिन वैश्विक आतंकवाद के केंद्र के रूप में उसकी प्रतिष्ठा कम नहीं होगी। राणा का प्रत्यर्पण पाकिस्तान को याद दिलाता है कि उसे मुंबई हमलों के अन्य अपराधियों को भी न्याय के कटघरे में लाना होगा, जिन्हें वह अभी भी बचा रहा है।
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यात्रा को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्या कहा था?
इससे पहले मानसरोवर की यात्रा को लेकर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि 2020 से 2024 तक तनावपूर्ण संबंधों ने दोनों देशों को नुकसान पहुंचाया है, जिसमें निलंबित सीधी उड़ानें और मानसरोवर यात्रा को रोकना जैसी बाधाएं अभी भी बनी हुई हैं। उन्होंने कहा, "हम यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या... हम इस पर आगे बढ़ सकते हैं। हम इस पर विचार कर रहे हैं क्योंकि... 2020-2024 के बीच हमने जो स्थिति देखी, वह किसी भी देश के हित में नहीं थी।"
बता दें, अक्टूबर 2024 में, भारत और चीन कई दौर की बातचीत के बाद देपसांग मैदानों और डेमचोक में पेट्रोलिंग अरेंजमेंट को लेकर एक समझौते पर पहुंचे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पिछले साल 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान कजान में भी मुलाकात की थी, जहां उन्होंने विघटन समझौते का स्वागत किया था।