Chamoli Avalanche: माणा एवलांच हादसे की होगी न्यायिक जांच, बद्रीनाथ के पास हिमस्खलन में हुई थी 8 मजूदरों की मौत
चमोली के जिलाधिकारी ने 28 फरवरी को माणा में हुए हिमस्खलन हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। एवलांच की चपेट में आने से 8 मजदूरों की मौत हुई थी।
- भारत
- 2 min read

उत्तराखंड के चमोली जिले में बदरीनाथ के पास माणा गांव में शुक्रवार, 28 फरवरी को हुए एवलॉन्च की घटना में 8 मजदूरों की मौत हो गई थी। हालांकि, लगभग 60 घंटे तक चले रेस्क्यू में 46 मजदूरों को बचा लिया गया था। अब माणा एवलॉन्च हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं। चमोली के जिलाधिकारी ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं।
उत्तराखंड के बद्रीनाथ से 3 किलोमीटर दूर माणा गांव के पास एक ग्लेशियर टूटने से बड़ा हादसा हुआ था जिसमें 54 मजदूर बर्फ के बड़े-बड़े टुकड़ों के नीचे दब गए थे। बर्फ के नीचे दबे मजूदरों को बचाने के लिए तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन जलाया गया था। सेना, NDRF, SDRF, ITBP और उत्तराखंड पुलिस के जवान ने संयुक्त अभियान चलाकर सभी मजदूरों को बाहर निकाला। मगर एवलांच की चपेट में आए 8 मजदूरों ने दम तोड़ दिया। अब हिमस्खलन की घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं।
माणा हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
चमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने 28 फरवरी को माणा में हुए हिमस्खलन हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। जोशीमठ के SDM को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। इस हादसे में 8 मजदूरों की मौत हो गई थी। तीन दिनों तक चले रेस्क्यू अभियान के दौरान घटनास्थल पर फंसे 54 से 46 मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया गया था।
हादसे की चपेट में आए थे 54 मजदूर
बता दें कि 28 फरवरी को आए इस एवलांच ने भारत-तिब्बत बॉर्डर के पास माणा गांव में स्थित बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) के कैंप को अपने चपेट में ले लिया था। हादसे के समय 54 मजदूर कैंप में थे और सभी एवलांच की चपेट में आ गए। पहले दिन 33 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला लिया गया था। खराब मौसम की वजह से रेस्क्यू में परेशानी आ रही थी। इलाके में लगातार बर्फबारी हो रही थी। बर्फबारी के बीच सेना के करीब 200 जवानों को इस रेस्क्यू ऑपेरशन में लगाया गया था। सेना ने लगातार संयुक्त रेस्क्यू चलाकर 46 मजदूरों को बचा लिया।