Anti Paper Leak Bill: राज्यसभा में जितेंद्र सिंह ने पेश किया एंटी पेपर लीक बिल, 7 घंटे तक होगी लंबी चर्चा
राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने एंटी पेपर लीक बिल पेश कर दिया है। लोकसभा में यह बिल 10 घंटे तक चली लंबी चर्चा के बाद पारित हुआ था, जिसके बाद अब इसे उच्च सदन में लाया गया है।
- भारत
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Anti Paper Leak Bill in Rajya Sabha: लोकसभा में पास होने के बाद अब राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पेश हो गया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बिल को उच्च सदन के पटल पर रखा। इस पर सात घंटे तक चर्चा होगी, जिसके बाद बिल पर वोटिंग की जाएगी।
जितेंद्र सिंह ने क्या-क्या कहा?
राज्यसभा में 'एंटी-पेपर लीक बिल' पेश करते हुए राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, "जैसा कि हम सभी जानते हैं, यह बिल निचले सदन से पास हो चुका है, जहां इसके लिए चर्चा के लिए 10 घंटे का समय दिया गया था। बार-बार रुकावटों और शोर-शराबे के बीच पूरा जवाब दिए जाने के बावजूद, चर्चा हुई। अब यह बिल ऊपरी सदन में आया है- बड़ों का सदन, वरिष्ठों का सदन, समझदार लोगों का सदन, परिपक्व लोगों का सदन।"
उन्होंने कहा कि यह बिल देश के छात्रों और युवाओं के कल्याण की रक्षा के लिए सरकार की सर्वोच्च प्रतिबद्धता को फिर से दोहराता है। हमारे पास 4 मुख्य भर्ती एजेंसियां हैं जो अलग-अलग सेक्टर के लिए परीक्षाएं आयोजित करती हैं, जैसे कि यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC), रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB) और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (IBPS)। हायर एजुकेशन में दाखिले की परीक्षाओं के लिए अब हमारे पास नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) है।
‘NTA बनाने का ख्याल 33 साल पहले आया था…’
जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह अजीब बात है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बनाने का विचार सबसे पहले 1992 में, यानी लगभग 33 साल पहले आया था। तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। समय-समय पर कई कमेटियों ने इस विचार को दोहराया और 2010 में भी एक कमेटी ने ऐसी एजेंसी बनाने की पुरजोर सिफारिश की थी। मुझे यकीन है कि वे (विपक्ष) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करेंगे और उन्हें धन्यवाद देंगे कि यह अधूरा काम अब पूरा किया जा रहा है।
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इससे पहले मंगलवार (28 जुलाई) को एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा में लाया गया। निचले सदन में बिल पर 10 घंटे तक चर्चा चली। चर्चा के दौरान लोकसभा में भारी हंगामा हुआ। पक्ष-विपक्ष के लोगों ने इस पर अपनी-अपनी राय रखी। कई विपक्षी सांसदों ने इस पर सवाल उठाए, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने जवाब दिया। इसके बाद बिल ध्वनिमत से पारित हो गया।