जामिया मिल्लिया इस्लामिया का बड़ा फैसला: दो दशक बाद चुनाव कराने का ऐलान, लेकिन यहां फंसा पेंच

Jamia Millia Islamia: दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया में करीब दो दशक बाद छात्रसंघ चुनाव होने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। सोमवार को यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे।

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Jamia university student union elections
जामिया में दो दशक बाद छात्रसंघ चुनाव कराने का ऐलान, पर यहां फंसा पेंच | Image: ANI

Jamia Millia Islamia: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी में करीब दो दशक बाद छात्रसंघ चुनाव होने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। सोमवार को जारी एक आदेश में, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। आदेश में कहा गया है, "जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ के चुनाव, छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने की तारीख से 15 दिनों के भीतर कराए जाएंगे।" यह घोषणा छात्रों के कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद आई है।

करीब दो दशक बाद छात्रसंघ चुनाव!

बता दें कि जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव को साल 2006 में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा भंग कर दिया था। इसके बाद समय-समय पर छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर मांग उठाते रहे हैं, लेकिन इसे लेकर को कोई अधिक एक्शन नहीं लिया जाता था।

सोमवार को जारी एक आदेश में, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। ऐसे में करीब दो दशक बाद जामिया में छात्रसंघ चुनाव का रास्ता साफ नजर आ रहा है। 

छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन बाद चुनाव

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा 26 अक्टूबर, 2026 को जारी एक आधिकारिक आदेश में कहा गया, "छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन बाद चुनाव कराए जाएंगे। इसके अलावा, विरोध-प्रदर्शन के दौरान छात्रों को दिए गए सभी निलंबन (सस्पेंशन) और 'शो-कॉज' नोटिस रद्द कर दिए गए हैं।

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साथ ही, विरोध-प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मचारियों की भूमिका की जांच के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। इसके बदले में, प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि वे विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ दिए गए किसी भी अपमानजनक बयान, की गई कार्रवाई या पोस्ट के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगे। साथ ही, सोशल मीडिया पर मौजूद ऐसी सभी पोस्ट को तुरंत हटा दिया जाएगा। इस आदेश के जारी होते ही विरोध-प्रदर्शन तुरंत समाप्त कर दिया गया।"

यहां फंसा पेंच

यह घोषणा स्टूडेंट्स के कई दिनों के प्रोटेस्ट के बाद आई है, जो चुने हुए स्टूडेंट्स यूनियन को फिर से शुरू करने की मांग कर रहे थे, जिसे यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने 2006 में भंग कर दिया था। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दिए गए आदेश के मुताबिक चुनाव की निश्चित तारीख संविधान को मंजूरी मिलने के बाद ही स्पष्ट होगी। 

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उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि एडमिनिस्ट्रेशन को सभी बाकी मांगों पर ठोस और टाइम-बाउंड फ़ैसले लेने चाहिए, और कहा कि सिर्फ़ नोटिस जारी करने से प्रोटेस्ट का हल नहीं माना जा सकता। स्टूडेंट्स ने फिर कहा कि जब तक एडमिनिस्ट्रेशन स्टूडेंट्स यूनियन को फिर से शुरू करने के लिए लिखकर वादा नहीं करता, चुनाव के लिए पक्की टाइमलाइन नहीं बताता और उनकी दूसरी मांगों पर ध्यान नहीं देता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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Published By:
 Sahitya Maurya
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