सिंधु जल संधि रोके जाने पर परमाणु धमकी देने वाले बिलावल भुट्टो को भारत का मुंहतोड़ जवाब, कहा- पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद पक्के तौर पर...

विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को कहा कि सिंधु जल संधि (IWT) पर भारत का रुख मजबूत और पहले जैसा ही है। पाकिस्तान की ओर से सीमा-पार आतंकवाद को लगातार समर्थन दिए जाने के कारण यह संधि अभी रुकी हुई है।

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india reiterates consistent stance on indus waters treaty
सिंधु जल संधि रोके जाने पर परमाणु धमकी देने वाले बिलावल भुट्टो को भारत का मुंहतोड़ जवाब | Image: Republic

विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को कहा कि सिंधु जल संधि (IWT) पर भारत का रुख मजबूत और पहले जैसा ही है। पाकिस्तान की ओर से सीमा-पार आतंकवाद को लगातार समर्थन दिए जाने के कारण यह संधि अभी रुकी हुई है।

MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जोर देकर कहा कि संधि पर आगे बढ़ने के लिए पाकिस्तान को आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करने की दिशा में भरोसेमंद और पक्के कदम उठाने होंगे।

जायसवाल ने कहा, "सिंधु जल संधि पर भारत का रुख एक जैसा रहा है। पाकिस्तान द्वारा सीमा-पार आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने के कारण IWT रुकी हुई है। पाकिस्तान को सीमा-पार आतंकवाद के लिए अपना समर्थन भरोसेमंद और पक्के तौर पर छोड़ना होगा।"

'तीस्ता नदी परियोजना पर हमारा नजरिया पहले से क्लियर'

ये बातें ऐसे समय में कही गई हैं जब भारत अपने पड़ोसी देश के साथ पानी के बंटवारे के समझौतों को व्यापक सुरक्षा और आपसी भरोसे के मुद्दों से जोड़कर देख रहा है। जायसवाल ने बांग्लादेश के साथ भारत की विकास साझेदारी के संदर्भ में तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना पर भी बात की।

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उन्होंने बताया कि बांग्लादेश में परियोजनाओं के लिए भारत की मदद आपसी सहमति से बने उस रोडमैप के आधार पर दी जाती है जिसकी नियमित समीक्षा होती है। उन्होंने आगे कहा, "बांग्लादेश में परियोजनाओं के लिए भारत की विकास सहायता आपसी सहमति से बने रोडमैप पर आधारित है, जिसकी नियमित समीक्षा की जाती है। तीस्ता नदी परियोजना पर हमारा नजरिया बांग्लादेश को पहले ही बताया जा चुका है। तीस्ता मुद्दे पर अपनी समग्र रणनीति में हम इससे जुड़े सभी घटनाक्रमों को ध्यान में रखेंगे।"

सिंधु जल संधि क्या है?

सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान की पानी की सप्लाई का मुख्य आधार है। 1960 की सिंधु जल संधि के तहत, भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों पर अधिकार मिले, जबकि पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का पानी मिला। हालांकि ये नदियां भारत से ही निकलती हैं या पाकिस्तान में प्रवेश करने से पहले भारत से होकर गुजरती हैं।

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इस संधि के दायरे में आने वाले पानी का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान जाता है, जिससे सिंचाई, खेती और पीने के पानी के लिए यह देश इस नदी प्रणाली पर बहुत ज्यादा निर्भर हो जाता है। नौ साल की बातचीत के बाद 19 सितंबर, 1960 को हुई सिंधु जल संधि को विश्व बैंक ने मध्यस्थता करके संपन्न कराया था।

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Published By:
 Kunal Verma
पब्लिश्ड