'एक खून माफ होता तो ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते, ये जेल जाएंगे...', VIP सुप्रीमो मुकेश सहनी ने दिया विवादित बयान, बवाल तय है
वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विवादास्पद बयान दिया है, जिसके बाद उनकी चौतरफा आलोचना हो रही है। उन्होंने कहा 'अगर एक खून माफ होता, तो वे उन्हें गोली मार देते। अब इसे लेकर सियासत भी तेज हो गई है।
- भारत
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विकासशील इंसान पार्टी के चीफ मुकेश सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) को लेकर विवादास्पद बयान दिया है। गुरुवार को मुकेश सहनी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'अगर उनको एक खून माफ होता तो वो सबसे पहले ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते।'
वीआईपी प्रमुख के इस विवादित बयान के बाद उनकी चौतरफा आलोचना हो रही है। उनके इस विवादित टिप्पणी के बाद राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने तीखा प्रहार करते हुए कहा 'जितनी उसकी आलोचना की जाए कम है। इस तरह का आदमी सोच भी नहीं सकता है, जो कोई कभी-कभी लोग बोल देते हैं।'
चुनाव आयोग पर विपक्ष का आरोप
दरअसल, देश भर में जारी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) को लेकर विपक्षी पार्टियों ने इसे रद्द करने की मांग करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार चुनाव आयोग को अपनी मनमर्जी से एक 'तानाशाह' की तरह रही है और उनका साथ मुख्य चुनाव आयुक्त दे रहे हैं।
वहीं, विकासशील इंसान पार्टी के चीफ मुकेश सहनी ने विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि 'अगर उनको एक खून माफ होता तो वो सबसे पहले ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते।' उनके इस बयान ने बाद सियासी हलचल तेज हो गई है।
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सहनी का चुनाव आयोग और केंद्र पर हमला
साहनी ने आरोप लगाया, "हमारे देश की सबसे बड़ी अथॉरिटी, सबसे बड़ा फैसला करने वाला—भारत का प्रधानमंत्री—यह सब करवा रहा है। डेमोक्रेसी को कुचला जा रहा है। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के बनाए संविधान को कुचला जा रहा है। 140 से 150 करोड़ नागरिकों की आंखों पर पट्टी बांधी जा रही है।"
उन्होंने आगे कहा, "चुनाव नेताओं के लिए नहीं होते—यह एक गलतफहमी है। चुनाव इस देश के लोगों के हैं। अगर कोई नेता काम नहीं करता है, तो उसे पद से हटाने की ताकत जनता के पास होती है। लेकिन जब जनता को उन्हें बाहर निकालने का समय आता है, तो वे चुनाव आयोग से समझौता करते हैं और बहुमत को अपने पक्ष में कर लेते हैं। आपने देखा कि बंगाल में क्या हुआ: सेना लगाकर और 27 लाख वोट हटाकर, उन्होंने सरकार बना ली। आपने देखा कि बिहार में क्या हुआ: चुनाव के ठीक बीच में, जब आदर्श आचार संहिता लागू थी, उन्होंने नतीजे को अपने पक्ष में करने के लिए खातों में ₹10,000 ट्रांसफर कर दिए।"
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मैंडेट को हाईजैक कर लिया गया है
ऐसे हालात में लोकतांत्रिक काम करने के मकसद पर सवाल उठाते हुए VIP सुप्रीमो ने कहा, "जो लोग इस देश के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं: चुनाव कराने की ज़हमत ही क्यों उठाई जाए? बस चुनाव पूरी तरह से बंद कर दो! जब लाखों-करोड़ों जनता के रुपये बर्बाद हो रहे हैं, सिर्फ़ इस तरह मैंडेट को हाईजैक करने के लिए, तो आपने पहले तीन इलेक्शन कमिश्नर क्यों अपॉइंट किए? आपको बस एक रखना चाहिए था!"
जितनी आलोचना की जाए कम है-राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा
मुकेश सहनी के विवादित बयान का जवाब देते हुए राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा '"इस तरह का बयान, अब डेमोक्रेसी में कोई व्यक्ति कहे कि गोली मार देते, अब क्या कहिएगा? मतलब जितनी उसकी आलोचना की जाए, कम है। इस तरह का आदमी सोच भी नहीं सकता है, जो कोई कभी-कभी लोग बोल देते हैं।"