भारत की जनगणना कैसे काम करती है और यह क्यों महत्वपूर्ण है? 1.4 अरब से ज्यादा आबादी की होगी गिनती

भारत की जनगणना हर 10 साल में होने वाली दुनिया की सबसे बड़ी गणना है। 2027 की यह पहली पूरी डिजिटल जनगणना दो चरणों में होगी, पहले घरों की सूची और आवास विवरण, फिर जनसंख्या गणना। इस बार इसमें जाति गणना भी शामिल होगी।

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how the Census of India works and why it is important India digital census 2027
भारत की जनगणना क्यों महत्वपूर्ण है? | Image: ANI

दुनिया की सबसे बड़ी और भारत की पहली डिजिटल जनगणना का शंखनाद हो गया है। भारत ने अपनी लंबे समय से स्थगित जनगणना आखिरकार शुरू कर दी है। यह दुनिया की सबसे बड़ी राष्ट्रीय जनसंख्या गणना है, जो देश भर में कल्याणकारी योजनाओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को पूरी तरह बदल सकती है।

भारत की जनगणना हर दस साल में होती है। यह सिर्फ लोगों की संख्या गिनने का काम नहीं है, बल्कि देश की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय स्थिति की पूरी तस्वीर पेश करती है। 2011 की अंतिम जनगणना में भारत की आबादी 1.21 अरब दर्ज की गई थी। अब अनुमान है कि यह 1.4 अरब से ज्यादा हो चुकी है, जिससे भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया है। भारत की जनगणना कैसे काम करती है और यह क्यों महत्वपूर्ण है, आइए जानते हैं।

जनगणना कैसे होगी?

नई जनगणना 2021 में आयोजित करने की योजना थी, लेकिन कोविड-19 महामारी और रसद संबंधी चुनौतियों के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 (बुधवार) से शुरू हो गया है और सितंबर तक पूरे देश में चलेगा। इस चरण में कर्मचारी लगभग एक महीने तक हर क्षेत्र में घरों, उपलब्ध सुविधाओं, आवास स्थिति और रहन-सहन की स्थिति की जानकारी करेंगे। इस बार जनगणना में पारंपरिक आमने-सामने सर्वे के साथ डिजिटल विकल्प भी शामिल किया गया है। नागरिक बहुभाषी स्मार्टफोन ऐप के जरिए जानकारी दे सकेंगे, जिसमें सैटेलाइट-आधारित मैपिंग भी होगी।

दूसरा चरण सितंबर 2026 से अप्रैल 2027 तक चलेगा। इसमें लोगों की सामाजिक और आर्थिक विशेषताओं जैसे धर्म और जाति की विस्तृत जानकारी दर्ज की जाएगी। पूरे अभियान में 30 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। 2011 में करीब 27 लाख गणककों ने 24 करोड़ से ज्यादा घरों का सर्वे किया था।

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जाति गणना

जनगणना का दूसरा चरण ऐतिहासिक रूप से पिछड़े वर्गों से आगे जातियों की व्यापक गिनती करेगा। 1951 में स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना के बाद से केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की ही गिनती की जाती रही है। 1931 के बाद पूर्ण जाति जनगणना नहीं हुई है। कई सरकारें इससे बचती रहीं, क्योंकि इससे सामाजिक तनाव बढ़ने और अशांति फैलने का खतरा माना जाता है।

जनगणना क्यों मायने रखती है?

भारत में राजनीति के लिए जनसंख्या के आंकड़े महत्वपूर्ण हैं। जनगणना से मिले आंकड़े सरकारी कल्याणकारी कार्यक्रमों, नीतियों और संसाधनों के वितरण का आधार बनते हैं। इससे संसद के निचले सदन और राज्य विधानसभाओं में सीटों का पुनर्निर्धारण भी हो सकता है, क्योंकि आबादी वृद्धि को ध्यान में रखकर सीटें बढ़ाई जा सकती हैं।

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2023 के एक कानून के तहत विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित हैं। इसलिए सीटों में वृद्धि से महिला प्रतिनिधित्व की संख्या भी बढ़ेगी। कोविड-19 महामारी और लॉजिस्टिकल चुनौतियों के कारण 2021 में होनी वाली जनगणना टाल दी गई थी। अब इसकी शुरुआत के साथ भारत अपनी विशाल आबादी की सटीक तस्वीर हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

जनगणना 2027 की खास बातें

यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। गणनाकार मल्टीलिंगुअल स्मार्टफोन ऐप का इस्तेमाल करेंगे, जिसमें सैटेलाइट मैपिंग भी शामिल है। नागरिकों को स्वयं जानकारी भरने की सुविधा मिलेगी। कुल 30 लाख से ज्यादा कर्मचारी इस काम में लगाए जाएंगे।

भारत में जनगणना ब्रिटिश काल 1872 से शुरू हुई स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना 1951 में हुई। आखिरी पूर्ण जाति गणना 1931 में हुई थी।

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Published By :
Sagar Singh
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