AIIMS का बेड नंबर 12, बीप देती मशीनें और मौत का इंतजार करता हरीश राणा...होगा चमत्कार या हार जाएगा विज्ञान; जानिए क्यों बेचैन हैं डॉक्‍टर्स?

Harish Rana: 13 सालों से बिस्तर पर जिंदा लाश की तरह पड़े हरीश राणा की सम्मानजनक विदाई की प्रक्रिया के अंतिम चरण को क्रियान्वित करना शुरू कर दिया गया है।

  • Facebook Share Icon
  • Twitter Share Icon
  • WhatsApp Share Icon
 
Follow : Google News Icon
Harish Rana
हरीश राणा | Image: X

Harish Rana: गाजियाबाद के हरीश राणा की इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया एम्स में पूरी की जा रही है। उनका लाइफ सपोर्ट सिस्टम जैसे फीडिंग ट्यूब और वेंटिलेटर पहले ही हटा दिया गया था। इसके बाद उन्हें नॉर्मल बेड पर शिफ्ट कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि जिस एम्स के ट्राम सेंटर के ICU वार्ड में उन्हें रखा गया है, उसके बाहर सन्नाटा पसरा हुआ है।

वार्ड के अंदर से सिर्फ मशीनों के 'बीप' की आवाज आ रही है। उधर, बेड नंबर 12 पर लेटे हरीश राणा को लेकर डॉक्टरों की बेचैनी बढ़ गई है। ऐसे में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

हरीशा राणा की हर परिस्थिति पर पैनी नजर

रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्तमान में हरीश राणा की स्थिति स्थिर बनी हुई है। हालांकि, एम्स के मेडिकल बोर्ड की ओर से उनकी पल-पल परिस्थिति पर नजर रखी जा रही है। भले ही उनकी फीडिंग ट्यूब हटा ली गई हो, लेकिन डॉक्टर अब भी उनके ब्रेन को ठीक रखने की दवाईयां दे रहे हैं। डॉक्टर इस बात का पूरा ध्यान रख रहे हैं कि हरीश राणा को दर्द न हो।

दूसरी तरफ, हरीश राणा के माता-पिता और परिवार के अन्य लोगों की काउंसिलिंग की जा रही है। वहीं उनकी मां अब भी चमत्कार की राह ताक रही हैं। उनके पिता की डॉक्टरों से गुहार है कि आखिरी पल में बेटे को दर्द नहीं होना चाहिए।

Advertisement

होगा चमत्कार या हारेगा विज्ञान?

ब्रेन डेड का मेडिकल साइंस के नजरिए से अर्थ यह है कि इंसान का दिमाग काम करना पूरी तरह से बंद कर चुका है। इस हालात में शख्स मशीनों के सहारे जिंदा है। लेकिन हरीशा राणा के मामले में उनका ब्रेन पूरी तरह डेड नहीं है। यही वजह है कि उनका अंग वर्तमान में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। विज्ञान की मानें तो वह कहता है कि यहां से वापसी संभव नहीं है। मगर, इतिहास में कुछ एक मामले ऐसे भी रहे हैं जहां लोग मौत को छूकर लौटे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि हरीश राणा के मामले में 'चमत्कार' होगा या फिर विज्ञान की हार हो जाएगी? इसके अलावा हरीश राणा के अंगदान की भी बात चल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका अंगदान कई लोगों को नई जिंदगी दे सकता है।  

एक हादसे ने छीन ली खुशियां

हरीश राणा की जिंदगी की खुशियां उस एक हादसे ने उस समय छीन ली, जब वो अपने इंजीनियर बनने के सपने को पूरा करने के लिए चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे। जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। साल 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। इसी दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित हैं। तब से वह पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट में हैं। वह 13 सालों से न ही उठ पाए और न ही बोल पाए। वो बिस्तर पर एक जिंदा लाश की तरह पड़े रहे।

Advertisement

अंतिम सफर पर हरीश राणा

सुप्रीम कोर्ट से निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति मिलने के बाद हरीश राणा का मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को जस्टिस जे.बी.पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने हरीश राणा के माता-पिता की याचिका पर पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी थी।

यह भी पढ़ें: 'राम मंदिर सचमुच बहुत सुंदर...', अयोध्या पहुंची विदेशी बच्ची ने शेयर किया अनुभव, भारत के लिए कही दिल जीत लेने वाली बात- VIDEO

Published By:
 Priyanka Yadav
पब्लिश्ड