अपडेटेड 25 March 2026 at 14:29 IST
Harish Rana: 13 साल की जंग के बाद कहा अलविदा... लेकिन पेरेंट्स के एक फैसले से दुनिया को देखते रहेंगे हरीश राणा और धड़कता रहेगा दिल
हरीश राणा के माता-पिता ने खुद पर टूट रहे दुखों के पहाड़ के बावजूद इंसानियत और त्याग की मिसाल कायम करते हुए जो फैसला लिया उसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। बेटे ने दुनिया को अलविदा कह दिया मगर उनका दिला धड़कता रहेगा।
- भारत
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हरीश राणा ने दुनिया को अलविदा कह दिया। दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में हरीश राणा का बुधवार को अंतिम संस्कार किया गया। परिवार के सदस्यों ने भारी मन से अपने कलेजे के टूकड़े को अंतिम विदाई दी। मगर दिल में एक सुकुन था कि आखिरकार उनके बेटे को 13 सालों के असहनीय दर्द से मुक्ति मिल गई। हरीश दुनिया से चल गए मगर उनके माता-पिता के फैसले की वजह से वो दुनिया देखतें रहेंगे और उनका दिल भी धड़कता रहेगा।
गाजियाबाद के 31 साल के हरीश राणा का दिल्ली के AIIMS में मंगलवार शाम को निधन हो गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एम्स में हरीश की इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की प्रक्रिया चल रही थी, जिसमें धीरे-धीरे उनके शरीर से सभी सपोर्ट सिस्टम हटा दिए गए थे। बुधवार को हरीश का अंतिम संस्कार दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में किया गया। उनके छोटे भाई आशीष राणा ने उन्हें मुखाग्नि दी।
माता-पिता ने पेश की मानवता की मिसाल
हरीश के माता-पिता ने एक ऐसा फैसला लिया है जो मानवता की मिसाल पेश करती है। उन्होंने अपने बेटे के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान करने का फैसला लिया था। परिवार ने खुद पर टूट रहे दुखों के पहाड़ के बावजूद इंसानियत और त्याग की मिसाल कायम करते हुए कहा कि उनका बेटा अब किसी की धड़कनों में जिंदा रहेगा और किसी की अंधेरी दुनिया में रोशनी लौटाएगा।
शरीर का ये अंग किया दान
हरीश के निधन के बाद पेरेंट्स की सहमति से AIIMS में उनकी दोनों आंखों की कॉर्निया और हृदय के वाल्व दान किया गया। अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि हरीश का हृदय, किडनी व लिवर दान नहीं हो सकता था, लेकिन परिवार की सहमति से दोनों कॉर्निया व हृदय के चारों वाल्व लेकर सुरक्षित रख दिया गया है। इसके बाद पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया।
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पंचतत्व में विलिन हरीश राणा
बता दें कि हरीश के पार्थिव शरीर को लेकर परिवार बुधवार सुबह दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित श्मशान घाट पहुंचा। हरीश की मां भी बेटे को अंतिम विदाई देने पहुंची । इस दौरान माता-पिता काफी भावुक थे। दोनों अपने आंसू रोक नहीं पा रहे थे,उन्हें देख वहां मौजूद हर शख्स का दिल भर आया। पिता का चेहरा भले मास्क से ढंका हो पर अंदर के भाव साफ दिखाई दे रहे थे। हरीश के पिता ने हाथ जोड़कर उपस्थित लोगों से अपील की,'कोई रोइएगा मत।' बेटे को दर्द से मुक्ति मिल गई है।
हरीश के पिता अशोक राणा के मुताबिक, बेटे की असाध्य हालत को देखते हुए परिवार पिछले तीन साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहा था। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को 32 साल के हरीश राणा के इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। 14 मार्च को हरीश को गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित उनके घर से AIIMS शिफ्ट किया गया था। फिर धीरे-धीरे पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू की गई थी। मंगलवार, 24 मार्च को हरीश ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
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Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 25 March 2026 at 14:29 IST