Harish Rana: पंचतत्व में विलीन हरीश राणा, दिल्ली के ग्रीन पार्क में हुआ अंतिम संस्कार, नम आंखों से पिता ने की ये भावुक अपील-VIDEO

दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में हरीश राणा का अंतिम संस्कार किया गया। परिवार के सदस्य भारी मन से अपने जिगर के टुकड़े को अंतिम विदाई दी। हरीश के छोटे भाई आशीष राणा ने उन्हें मुखाग्नि दी।

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गाजियाबाद के 31 वर्षीय हरीश राणा का 13 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद दिल्ली के AIIMS अस्पताल में निधन हो गया। मंगलवार शाम उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। सालों से जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। जिसके बाद उन्हें घर  से एम्स में शिफ्ट किया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शमशान घाट में आज हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ। भारी मन से परिवार ने अपने जिगर के टुकड़े को अंतिम विदाई। इस दौरान हरीश के पिता ने एक भावुक अपील भी की।

दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में हरीश राणा का अंतिम संस्कार किया गया। परिवार के सदस्य भारी मन से अपने जिगर के टुकड़े को अंतिम विदाई देने पहुंचे। हरीश के छोटे भाई आशीष राणा ने उन्हें मुखाग्नि दी। परिवार के साथ-साथ बड़ी संख्या में सोसाइटी के लोग में हरीश को अंतिम विदाई देने शमशान घाट पहुंचे थे।

पंचतत्व में विलीन हरीश राणा

हरीश के पार्थिव शरीर को लेकर परिवार सुबह करीब 7 बजे के आसपास दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित श्मशान घाट पहुंचा। हरीश की मां भी बेटे को अंतिम विदाई देने पहुंची । इस दौरान माता-पिता काफी भावुक थे। दोनों अपने आंसू रोक नहीं पा रहे थे,उन्हें देख वहां मौजूद हर शख्स का दिल भर आया। पिता का चेहरा भले मास्क से ढंका हो पर अंदर के भाव साफ दिखाई दे रहे थे। इस दौरान हरीश के पिता ने हाथ जोड़कर उपस्थित लोगों से अपील की, “कोई रोइएगा मत।” उन्होंने कहा कि अब उनके बेटे को दर्द से मुक्ति मिल गई है।

देश का पहला इच्छामृत्यु का मामला

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश में पहली बार किसी व्यक्ति को इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) दी गई।  कोर्ट के आदेश के बाद  14 मार्च को 32 साल के हरीश राणा को गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित उनके घर से AIIMS शिफ्ट किया गया था। फिर धीरे-धीरे पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू की गई। पहले हरीश की पानी वाली ट्यूब (हाइड्रेशन) और फीडिंग ट्यूब को हटा दिया गया और उसमें कैप लगा दिया गया है। फिर ऑक्सीजन सपोर्ट को भी बंद किया गया। 24 मार्च मंगलवार शाम 4 बजकर 10 मिनट पर हरीश ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

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क्या हुआ था हरीश के साथ?

जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। इसी दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। गंभीर रूप से घायल हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बाद में दिसंबर 2013 में उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित हैं। तब से वे पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट में हैं- न उठ पाए, न बोल पाए। पिछले 13 सालों से हरीश जिस दर्द से गुजर रहे थे, साथ ही उनके परिवार ने जो त्याग किए और कष्ट सहे, उसके बारे में जानकर हर आंख नम हो जाती है।

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Published By:
 Rupam Kumari
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