सूख गया जून, आधी रह गई बारिश...जानिए कैसे अल नीनो ने बना दिया सबसे खराब मॉनसून

जून का महीना खत्म होने की कगार पर है, लेकिन देश में मॉनसून की रफ्तार बेहद सुस्त और चिंताजनक बनी हुई है। देश के अधिकांश हिस्सों में झुलसाने वाली गर्मी का प्रकोप जारी है और आसमान से राहत की बूंदें गायब हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जून में मॉनसून में 46% बारिश की भारी कमी दर्ज की जा चुकी है, जिसने कृषि क्षेत्र और आम जनता की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

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half-rainfall-dry-june-el-nino-brought-worst-monsoon-ever-know-reason | Image: X

साल 2026 में भारत का मॉनसून सीजन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है, जिसने किसानों से लेकर मौसम वैज्ञानिकों तक की चिंता बढ़ा दी है। जून का महीना आधा बीतने के बाद भी आसमान से राहत की बूंदें गायब हैं। आइए जानते हैं कि देश में सूखे के इस नए संकट के पीछे क्या कारण हैं और क्या आने वाले दिनों में स्थिति सुधरेगी।

46% कम बरसे बदरा

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 21 जून 2026 तक देश में औसतन केवल 46mm बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि तक 84.4mm बारिश हो जानी चाहिए थी। यह सीधे तौर पर 46% की भारी कमी को दर्शाता है। यदि शुरुआती दिनों में ही पानी की इतनी किल्लत रहेगी, तो आने वाले महीनों में खेती, जलाशयों के जलस्तर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

प्रशांत महासागर में पानी का तापमान बढ़ा 

प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में पानी का तापमान असामान्य रूप से बढ़ रहा है। यह अल-नीनो आने वाले दिनों में और मजबूत होगा, जिससे वैश्विक मौसम चक्र बिगड़ रहा है और भारत में बारिश कम हो रही है। हिंद महासागर की यह स्थिति फिलहाल न्यूट्रल है। अगर यह 'पॉजिटिव' होती, तो अल-नीनो के बुरे असर को कम कर सकती थी, लेकिन फिलहाल इससे कोई मदद नहीं मिल रही है। भूमध्य रेखा के पास बादलों और बारिश को नियंत्रित करने वाला यह सिस्टम भी भारत के पक्ष में नहीं है, जिससे नमी वाली हवाएं (विशेषकर मध्य भारत में) कमजोर पड़ गई हैं।

अल-नीनो और सूखे का नाता

भारतीय मॉनसून का इतिहास हमेशा से उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 1871 से 2015 के बीच भारत ने 26 बार भयंकर सूखे का सामना किया है। साल 1972 में देश में 23.9% कम बारिश हुई थी, वहीं साल 2009 में भी 22% की भारी कमी दर्ज की गई थी। आंकड़े बताते हैं कि 1950 के बाद के अधिकांश सूखे अल-नीनो वर्षों के दौरान ही पड़े हैं (जैसे 1982 और 2015)।आपको बता दें,1997 में मजबूत अल-नीनो के बावजूद पॉजिटिव IOD के कारक सामान्य बारिश हुई थी। क्लाइमेट चेंज के कारण अब भारी बारिश या लंबे सूखे जैसी चरम मौसमी घटनाएं बढ़ गई हैं। IMD के मुताबिक, इस साल (2026) मॉनसून के सामान्य से कम (90% LPA) रहने की 60% संभावना है।

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IMD का अनुमान है कि जून के आखिरी हफ्ते से स्थितियां बदल सकती हैं। अरब सागर से नमी लाने वाला 'सोमाली जेट' अब मजबूत हो रहा है। इसके सक्रिय होने से महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड और बिहार जैसे राज्यों में बारिश की रफ्तार बढ़ेगी। फिलहाल बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश भीषण हीटवेव और रिकॉर्ड तापमान से जूझ रहे हैं, जिससे मुश्किलें दोगुनी हो गई हैं।

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Published By:
 Aarya Pandey
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