हरियाली और खुशहाली- THE GREEN CAPITAL OF INDIA: EV अपनाओ, प्रदूषण मुक्त भारत बनाओ
रिपब्लिक भारत ने 1 अक्टूबर को दिल्ली में 'हरियाली खुशहाली - THE GREEN CAPITAL OF INDIA' कॉनक्लेव आयोजित किया। कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों और उद्योगपतियों ने सतत भविष्य का रोडमैप साझा किया।
- भारत
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पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए रिपब्लिक भारत ने 1 अक्टूबर को राजधानी दिल्ली के एक प्रतिष्ठित फाइव स्टार होटल में 'हरियाली खुशहाली - THE GREEN CAPITAL OF INDIA' कॉनक्लेव का भव्य आयोजन किया। देश के दिल कहे जाने वाले दिल्ली में आयोजित इस खास मंच पर नीति-निर्माताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों और उद्योग जगत के दिग्गजों ने एक साथ जुटकर भारत के हरित और सतत भविष्य का नया रोडमैप बताया।
दिल्ली को ग्रीन कैपिटल बनाने में प्रयास जरूरी: सीएम रेखा गुप्ता
कार्यक्रम की भव्यता तब और बढ़ गई जब दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी इस मंच पर अपनी खास उपस्थिति दर्ज कराई। शहर के हरित भविष्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने दिल्ली में बढ़ती हरियाली और पर्यावरण सुधार की दिशा में हो रहे प्रयासों पर अपनी खुशी व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने माना कि दिल्ली को ग्रीन कैपिटल बनाने का सपना केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग और ऐसी सजग पहलों के एकजुट प्रयास से ही साकार होगा।
कोविड महामारी के दौरान हुई लिवांटो ग्रीन की शुरुआत
इस कार्यक्रम में ईवी चार्जिंग स्टेशन लिवांटो ग्रीन के संस्थापक अश्विनी दीक्षित ने भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन मोबिलिटी के भविष्य पर विस्तार से चर्चा की। अश्विनी दीक्षित ने बताया कि साल 2021 में कोविड-19 महामारी के समय जब देश में लॉकडाउन लगा, तब हवा और पर्यावरण में अप्रत्याशित स्वच्छता और शांति देखने को मिली थी। न गाड़ियों का शोर था और न ही सड़कों पर धुआं।
उन्होंने कहा कि कोविड से बचने के बाद उनके मन में यह संकल्प आया कि उन्हें पर्यावरण के प्रति अपना योगदान देना चाहिए। जैसे रामसेतु बनाते समय एक गिलहरी ने भी अपना छोटा सा योगदान दिया था, वैसे ही उन्होंने भी सोचा कि प्रदूषण कम करने के लिए उनसे जितना हो सकेगा, उतना प्रयास करेंगे। इसी सोच के साथ लिवांटो ग्रीन के सफर की शुरूआत हुई थी।
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Range Anxiety को दूर करने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने में सबसे बड़ी बाधा Range Anxiety होती है, यानी यात्रियों को यह डर रहता है कि रास्ते में गाड़ी की बैटरी खत्म हो जाने पर चार्जिंग स्टेशन मिलेगा या नहीं। इसी 'रेंज एंग्जायटी' को दूर करने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर अश्विनी दीक्षित ने जोर दिया। क्योंकि उनका मानना है कि जब तक देश में एक मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और इकोसिस्टम तैयार नहीं होगा, तब तक केवल गाड़ियां बेचने से ईवी क्रांति सफल नहीं हो सकती।
इसलिए लिवांटो ग्रीन देशभर में जहां-जहां इंटरनेट और अनुकूल लोकेशंस उपलब्ध हैं, वहां तेजी से चार्जिंग स्टेशन स्थापित कर रहा है। दिल्ली नगर निगम (MCD) के साथ मिलकर कंपनी दिल्ली में 100 नई चार्जिंग साइट्स पर काम कर रही है, जो जल्द ही सक्रिय हो जाएँगी। दिल्ली में फिलहाल हर 3 से 4 किलोमीटर के दायरे में चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है। लिवांटो का लक्ष्य है कि उपभोक्ता को 90% से अधिक यह भरोसा रहे कि आगे का स्टेशन चालू स्थिति में मिलेगा।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के विजन को ध्यान में रखते हुए लिवांटो चार्जिंग नेटवर्क को उसी रफ्तार से बढ़ा रहा है। आज भारत में औसतन 235 गाड़ियों पर 1 चार्जर है, जिसे 2030 तक 5 गाड़ियों पर 1 चार्जर के अनुपात पर लाने की योजना है।
स्वच्छ और सौर ऊर्जा से ईवी चार्जिंग का मॉडल
EV गाड़ियों की चार्जिंग के लिए एक बड़ा सवाल ये आता है कि ईवी को चार्ज करने के लिए बिजली कहाँ से आती है, क्या भारत में ईवी मुख्य रूप से कोयले से बनी बिजली पर निर्भर है?
अश्विनी दीक्षित ने यह भ्रांति दूर करते हुए स्पष्ट किया कि भारत आज 99% रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन हासिल कर चुका है, जो दुनिया में एक मिसाल है। इसके साथ ही, कुसुम योजना और गुजरात में 700 वर्ग किलोमीटर में फैले विशाल सोलर पार्कों के माध्यम से देश तेजी से सोलर एनर्जी की ओर बढ़ रहा है। लिवांटो ग्रीन खुद हाईवे पर सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पन्न करने, उसे स्टोर करने और फिर ईवी चार्जिंग के लिए उपलब्ध कराने के मॉडल पर काम कर रहा है, जिससे 24 घंटे स्वच्छ और सौर ऊर्जा आधारित चार्जिंग संभव हो सकेगी।
अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए ईवी का महत्व
लिवांटो ग्रीन के मालिक अश्विनी दीक्षित के अनुसार, भारत में ईवी क्रांति केवल एक वाहन बदलने का जरिया नहीं है, बल्कि यह देश को प्रदूषण मुक्त बनाने और विदेशी मुद्रा की बचत करने का एक राष्ट्रीय अभियान है। इलेक्ट्रिक व्हीकल अपनाने के आर्थिक और पर्यावरण लाभों को रेखांकित करते हुए अश्विनी दीक्षित ने कहा कि वर्तमान में भारत ईंधन आयात पर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। लेकिन 2030 तक 30% ईवी अपनाने से देश का लगभग $60,000 करोड़ का विदेशी मुद्रा भंडार बाहर जाने से बचेगा।
अगर कोई व्यक्ति रोजाना 200 किलोमीटर तक गाड़ी चलाता है और घर पर रात में ओवरनाइट चार्जिंग करता है, तो ईवी उसके लिए सबसे किफायती और समझदारी भरा विकल्प है। दो पैसे नफा या नुकसान देखने के बजाय हर नागरिक का यह कर्तव्य बनता है कि वह भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रदूषण मुक्त हवा और स्वच्छ वातावरण बनाने में ईवी अपनाकर अपना योगदान दे।