लुप्त होने की कगार पर थी Great Indian Bustard की नस्ल, कच्छ में 10 साल बाद चूजे का हुआ जन्म, इस तरह बचाई जान

Great Indian Bustard Chick Born: गुजरात के वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुनभाई मोढवाडिया ने जानाकारी दी है कि, कच्छ के अब्दासा इलाके में एक दशक बाद ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (घोड़ाड) के चूजे का जन्म हुआ है। जो सभी के लिए गर्व का पल है। दरअसल, वन्यजीव संरक्षण में ये एक अहम मुकाम है, क्योंकि घोड़ाड पक्षियों की आबादी में नर पक्षियों की कमी होती जा रही थी। पढ़ें पूरी खबर।

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Bustard Chick born chick in kutch
कच्छ में घोड़ाड चूजे को कैसे बचाया? पढ़ें | Image: X/@byadavbjp / Representative

Bustard Chick born in kutch: कच्छ के अब्दासा में 10 साल बाद ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी 'घोड़ाड पक्षी' का चूजा पैदा हुआ है। यह वन्यजीव संरक्षण के लिए एक बड़ा गर्व का पल है। क्योंकि कच्छ में घोड़ाड पक्षियों की आबादी में नर पक्षियों की कमी थी, दरअसल मादा पक्षी जो अंडे दे रही थीं, वे निषेचित (Fertilized) नहीं हो पा रहे थे। इस चुनौती से निपटने के लिए, एक खास संरक्षण प्लान बनाया गया और तब जाकर अंडे को बचाया जा सका, संरक्षण के दौरान स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण बन गई थी। आखिरकार 19 घंटे सड़क यात्रा करने के बाद अंडे को कच्छ पहुंचाया गया, जिसके बाद स्वस्थ चूजा पैदा हुआ। ये पूरा प्रोसेस बहुत उत्साहित कर देने वाला था।

वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि गुजरात और राजस्थान के वन विभाग, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के मिले-जुले प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल हुई। मंत्री ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में वन विभाग की तारीफ की। उन्होंने सभी अधिकारियों और टीम के सदस्यों को बधाई दी।

अंडे को बचाने के लिए अपनाई 'जंपस्टार्ट अप्रोच', ऐसे हुआ चमत्कार

मंत्री ने बताया कि यह सफलता ‘जंपस्टार्ट अप्रोच’ नाम की आधुनिक संरक्षण मेथड (Modern Conservation Methods) से संभव हुई। कच्छ में घोड़ाड पक्षियों की आबादी में नरों की कमी थी, इसलिए मादाएं जो अंडे दे रही थीं वे निषेचित (Fertilized) नहीं हो पा रहे थे। इस समस्या को हल करने के लिए राजस्थान के प्रजनन केंद्र से एक निषेचित अंडा लाया गया। इसके बाद 22 मार्च को पोर्टेबल इनक्यूबेटर में 19 घंटे की सड़क यात्रा के बाद यह दूसरा अंडा कच्छ पहुंचाया गया। फिर मां मादा घोड़ाड के घोंसले में अनिषेचित अंडे को हटाकर निषेचित अंडा रख दिया गया। मादा ने खुद इसे सेता और 26 मार्च को एक स्वस्थ चूजा पैदा हुआ।  

यह वाकई में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी सफलता है। इस प्रक्रिया को 'क्रॉस-फॉस्टरिंग' (Cross-fostering) कहा जाता है, जहां वैज्ञानिक रूप से तैयार किए गए निषेचित अंडे (Fertilized egg) को जंगली पक्षी के घोंसले में रखा जाता है।

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PC : @byadavbjp

'जंपस्टार्ट अप्रोच' मेथड भी समझे..

'जंपस्टार्ट अप्रोच'  एक तात्पर्य प्रक्रिया या योजना को तेजी से शुरू करने, उसमें तत्काल सुधार या परिणाम प्राप्त करने की एक रणनीतिक विधि है। वन्यजीव संरक्षण (जैसे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) में, यह एक प्रजाति को बचाने के लिए कृत्रिम प्रजनन या अंडों के स्थानांतरण जैसी त्वरित और आधुनिक तकनीकों का उपयोग है। इस मेथड से लुप्त होती प्रजाति को बचाने की कोशिश की जा सकती है।

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PC : @byadavbjp

प्रोजेक्ट GIB की सफल यात्रा

2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत 2016 में ‘प्रोजेक्ट GIB’ शुरू किया गया था। राजस्थान के सैम और रामदेवरा में बने प्रजनन केंद्रों में अब घोड़ाड पक्षियों की संख्या बढ़कर 73 हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी एक्स पर इस खबर को शेयर करते हुए अपनी खुशी जताई। उन्होंने गुजरात, राजस्थान और WII के संयुक्त प्रयासों की सराहना की। फिलहाल फील्ड मॉनिटरिंग टीम मादा घोड़ाड और उसके चूजे पर लगातार नजर रख रही है। अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि यह चूजा सुरक्षित रहेगा और भविष्य में कच्छ की घोड़ाड आबादी बढ़ाने में मदद करेगा। यह उपलब्धि न सिर्फ वैज्ञानिकों और वनकर्मियों के लिए गर्व की बात है, बल्कि भारत की वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिकी बचाने की मजबूत ताकत को भी दिखाती है।

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Published By :
Nidhi Mudgill
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