8th Pay Commission: न्यूनतम सैलरी 69,000 रुपये और हर साल 6% इंक्रीमेंट! 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों के लिए गेम चेंजर प्रस्ताव
8th Pay Commission: नेशनल काउंसिल (NC-JCM) ने 8वें वेतन आयोग को मेमोरेंडम सौंपा है। इसमें 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 से बढ़कर 69,000 रुपये हो जाएगी।
- भारत
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8th Pay Commission: सातवें वेतन आयोग के बाद अब आठवें वेतन आयोग की चर्चा जोरों पर है। हाल ही में नेशनल काउंसिल ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की स्टाफ साइड ने 51 पृष्ठों का विस्तृत मेमोरेंडम आयोग को सौंपा है। इसमें सबसे चर्चित प्रस्ताव न्यूनतम बेसिक सैलरी को वर्तमान 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने का है। यह मांग 5 यूनिट फैमिली मॉडल पर आधारित है, जो कर्मचारियों के वास्तविक पारिवारिक खर्चों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।
सातवें वेतन आयोग ने 2016 में न्यूनतम बेसिक पे 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये किया था। फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था। अब NC-JCM का कहना है कि महंगाई, रहन-सहन की बढ़ती लागत और सामाजिक जिम्मेदारियों को देखते हुए यह राशि पर्याप्त नहीं रही।
5 यूनिट फैमिली मॉडल आधार
स्टाफ साइड ने 3.833 का फिटमेंट फैक्टर सुझाया है। अगर यह स्वीकार होता है तो न्यूनतम सैलरी लगभग 69,000 रुपये हो जाएगी। अधिकतम सैलरी को भी 2,15,000 रुपये तक प्रस्तावित किया गया है। इस प्रस्ताव का आधार '5 यूनिट फैमिली मॉडल' है। वर्तमान में परिवार को 3 यूनिट माना जाता है- कर्मचारी (1 यूनिट), पत्नी (0.8 यूनिट) और दो बच्चे (0.6 यूनिट प्रत्येक)।
NC-JCM ने इसे पुराना और अनुचित बताया है। नई मांग में परिवार को 5 यूनिट माना गया है- कर्मचारी 1 यूनिट, पति/पत्नी 1 यूनिट (लिंग भेदभाव समाप्त), दो बच्चे और माता-पिता को भी शामिल किया गया है। माता-पिता के लिए 0.8 यूनिट प्रत्येक रखी गई है, जिससे कुल लगभग 5.2 यूनिट बनती है, जिसे 5 यूनिट पर गोल किया गया।
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माता-पिता भी परिवार का हिस्सा
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन्स एक्ट और सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 में भी माता-पिता को परिवार का हिस्सा माना गया है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि सरकारी नौकरी केवल अनुबंध नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने वाली स्थिति है।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि न्यूनतम वेतन केवल गुजारा भत्ता नहीं, बल्कि गरिमापूर्ण जीवन का आधार होना चाहिए। मेमोरेंडम में न्यूनतम वेतन की गणना करते समय खाद्य पदार्थों की औसत खुदरा कीमतें, कपड़े, आवास (7.5%), ईंधन-बिजली (20%), कौशल विकास (25%), शादी-त्योहार आदि अतिरिक्त खर्च (25%) और टेक्नोलॉजी चार्ज (5%) को शामिल किया गया है। इससे न्यूनतम पे 69,000 रुपये निकला। साथ ही, सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने, पे लेवल को 18 से घटाकर 7 करने, न्यूनतम 5 प्रमोशन सुनिश्चित करने और पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) बहाल करने जैसी अन्य मांगें भी शामिल हैं।
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HRA के न्यूनतम स्लैब को 30% तक बढ़ाने और पेंशन को अंतिम वेतन का 67% करने का प्रस्ताव है। सभी लाभ 1 जनवरी 2026 से लागू करने की मांग की गई है। ये सिफारिशें लागू होने पर 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वित्तीय जीवन में बड़ा परिवर्तन आ सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला आयोग और सरकार पर निर्भर करेगा।