Kolkata: दूसरे चरण की वोटिंग से पहले कोलकाता में ED का बड़ा एक्शन, राशन घोटाले मामले में 9 जगहों पर मारी रेड, तलाशी अभियान जारी

Ration Scam Case: प्रवर्तन निदेशालय ने राशन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोलकाता में कई जगहों पर छापेमारी की है। एजेंसी ने हाल ही में TMC की पूर्व सांसद नुसरत जहां से पूछताछ भी की थी।

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ED Raids in kolkata
कोलकाता में ईडी की रेड | Image: ANI

Kolkata News: पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के लिए मतदान 29 अप्रैल को होने है। इससे पहले कोलकाता में राशन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की टीम ने कोलकाता के कई इलाकों में आज (25 अप्रैल) को छापे मारे हैं।

कोलकाता में 9 ठिकानों पर ED ने मारी रेड

अधिकारियों के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय राशन घोटाले से जुड़ी अपनी जारी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में कोलकाता में कई जगहों पर तलाशी ले रहा है। एक बयान में बताया कि ईडी ने कोलकाता जोनल कार्यालय PDS घोटाले के मामले में निरंजन चंद्र साहा और अन्य से जुड़े कोलकाता, बर्दवान और हाबरा स्थित आपूर्तिकर्ताओं और निर्यातकों से जुड़े 9 ठिकानों पर रेड मारी। ईडी की टीम कथित अनियमितताओं और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है।

नुसरत जहां से हुई पूछताछ

इससे पहले मामले की जांच करते हुए बीते दिनों ईडी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पूर्व सांसद नुसरत जहां को समन भेज तलब किया था। वे बुधवार (22 अप्रैल) को कोलकाता स्थित ईडी के कार्यालय में पेश भी हुई थीं। नुसरत जहां उस समय बशीरहाट से सांसद थीं। ईडी इस मामले में उनसे पूछताछ कर रही है।

क्या है मामला?

मामला कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान का है। तब पश्चिम बंगाल के बशीरहाट सीमावर्ती इलाकों में बांग्लादेश को गेहूं और चावल की तस्करी के आरोप में कई ट्रक जब्त हुए थे। जांच के दौरान राशन तस्करी मामले में कई नाम सामने आए हैं।

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जांच से पता चला कि आरोपी ने कल्याणकारी लाभार्थियों के लिए निर्धारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के गेहूं को दूसरी जगह भेजने के लिए एक सुनियोजित तरीका अपनाया था। यह गेहूं आपूर्तिकर्ताओं, लाइसेंस प्राप्त वितरकों, डीलरों और बिचौलियों की मिलीभगत से, अनधिकृत माध्यमों से कम कीमतों पर खरीदा गया था। बड़ी मात्रा में गेहूं को आपूर्ति श्रृंखला से अवैध रूप से हटाकर कई जगहों पर जमा किया गया। इसकी असली पहचान छिपाने के लिए, आरोपी ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य सरकार के निशान वाले मूल बोरे हटा दिए या उन्हें उल्टा कर दिया, और फिर उनमें गेहूं भर दिया; इस तरह उन्होंने पहचान के निशानों को छिपा दिया और PDS के गेहूं को खुले बाजार में आगे बेचने या निर्यात करने के लिए 'वैध स्टॉक' के रूप में पेश किया।

अधिकारियों के अनुसार, इसके परिणामस्वरूप आरोपियों ने अनुचित रूप से धन कमाया और 'अपराध से अर्जित संपत्ति' (Proceeds of Crime) पैदा की।

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मामले में ईडी ने पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक को गिरफ्तार किया था। हालांकि, फिलहाल वे जमानत पर बाहर हैं। TMC ने उन्हें हाबड़ा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है।

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Disclaimer: इस आर्टिकल में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं.