Chhath Puja 2024: छठ व्रतियों ने डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य, CM नीतीश ने भी की पूजा

गुरुवार की शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया गया। अब शुक्रवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही महापर्व का समापन होगा।

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chhath puja 2024
chhath puja 2024 | Image: X- ANI

Chhath Puja 2024: लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की देशभर में धूम देखने को मिल रही है। आज (7 नवंबर) को छठ पूजा के तीसरे दिन लाखों श्रद्धालुओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिखा। इस दौरान घाटों पर भीड़ उमड़ पड़ी।

गुरुवार की शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया गया। अब शुक्रवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही महापर्व का समापन होगा।

घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत कई शहरों में डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर लोगों की भीड़ उमड़ी। शाम होने से पहले ही व्रती तालाबों और नदियों पर पहुंचने लगे। बड़ी संख्या में लोग अपने पूरे परिवार के साथ और पूरे विधि-विधान से छठ व्रतियों ने डूबते सूर्य एवं छठ माता की आराधना की।

बिहार के CM नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अलावा पूर्व CM लालू यादव और तेजस्वी यादव ने भी घाट पहुंचकर छठ पर पूजा की।

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CM नीतीश संग पटना के गंगा घाट पहुंचे जेपी नड्डा

बिहार के CM नीतीश कुमार, BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा पटना के गंगा घाट पहुंचे।

इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने परिवार के साथ छठ पूजा की रस्में निभाईं।

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लालू यादव भी तेजस्वी के साथ रहे मौजूद 

इसके अलावा RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव भी अपने बेटे तेजस्वी यादव के साथ गंगा घाट पहुंचे। इस दौरान तेजस्वी यादव ने लोगों को छठ की शुभकामनाएं दी और कहा, "प्रदेशवासियों, देशवासियों को हम छठ पर्व की शुभकामनाएं देते हैं। यह बहुत कठिन पूजा है। आज हम सभी डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे। बड़ी संख्या में लोग आए हैं। हम छठी मईया से प्रार्थना करेंगे कि अमन-शांति बनी रहे, बिहार आगे बढ़ता रहे, सभी के जीवन में सुख, शांति आए, बिहार और देश आगे बढ़े। अब यह छठ पूजा कई राज्यों में मनाई जा रही है, देश के बाहर भी जो लोग छठ पूजा मना रहे हैं, उन्हें हमारी शुभकामनाएं।"

यह त्योहार कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और दिवाली के छह दिन बाद शुरू होता है। इस साल चार दिवसीय उत्सव की शुरुआत पांच नवंबर को 'नहाय खाय' अनुष्ठान के साथ हुई। इसके अगले दिन खरना पूजा संपन्न हुई। तीसरे दिन यानी बृहस्पतिवार को अस्त होते सूर्य को 'पहला अर्घ्य' या 'संध्या अर्घ्य' दिया गया। अगली सुबह उगते सूरज को अर्घ्य दिया जाएगा और इसके साथ ही यह पर्व आठ नवंबर को सुबह समाप्त होगा।

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Published By :
Ruchi Mehra
पब्लिश्ड