'चाहे हम पसंद करें या नहीं, लेकिन...', औरंगजेब कब्र विवाद पर देवेंद्र फडणवीस की दो टूक, किया सरकार का रुख साफ
औरंगजेब की कब्र के विवाद पर देवेंद्र फडणवीस का बयान ऐसे समय आया है, सहयोगी पार्टी शिवसेना समेत तमाम हिंदू संगठन इस मुद्दे को लेकर आक्रामक है।
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Devendra Fadnavis: महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को लेकर विवाद के बीच राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा बयान दे दिया है। उन्होंने औरंगजेब की कब्र के मसले पर महाराष्ट्र सरकार का स्पष्ट किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को छत्रपति संभाजीनगर जिले से मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को खारिज करते हुए कहा कि ये एक संरक्षित स्मारक है। हालांकि उन्होंने मुगल सम्राट का महिमामंडन करने के खिलाफ चेतावनी भी दी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने एक बयान में कहा- 'चाहे हम औरंगजेब को पसंद करें या नहीं, उसकी (औरंगजेब) कब्र एक संरक्षित स्मारक है। हालांकि हम किसी को भी उसका महिमामंडन करने की अनुमति नहीं देंगे।' अपने बयान में मुख्यमंत्री ने ये भी कहा है कि कानून के दायरे से बाहर के ढांचों को हटाया जाना चाहिए।
हिंदू संगठनों की मांग के बीच फडणवीस का बयान आया
देवेंद्र फडणवीस का बयान ऐसे समय आया है, सहयोगी पार्टी शिवसेना समेत तमाम हिंदू संगठन इस मुद्दे को लेकर आक्रामक है। पिछले दिनों नागपुर में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। इसके अलावा हाल ही में शिवसेना के एक नेता ने दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्री को एक पत्र सौंपा था। इस पत्र में औरंगजेब की कब्र को संरक्षित स्मारक के दायरे से बाहर करने की मांग की गई थी। 3 दिन पहले शिवसेना नेता राहुल शेवाले ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत से मुलाकात की। चिट्ठी के जरिए मांग की गई कि औरंगजेब के मकबरे को राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों की सूची से हटाया जाए।
शिवसेना नेता ने चिट्ठी में क्या लिखा?
शिवसेना नेता ने चिट्ठी में लिखा- 'औरंगजेब एक रूढ़िवादी इस्लामी शासक था, जिसके शासनकाल में धार्मिक असहिष्णुता और उत्पीड़न के ऐतिहासिक विवरण दर्ज हैं। उसके अत्याचार के सबसे उल्लेखनीय उदाहरणों में से एक 1689 में छत्रपति संभाजी महाराज की क्रूर हत्या थी, जिन्हें इस्लाम धर्म अपनाने से इनकार करने पर 40 दिनों तक अमानवीय यातनाएं दी गईं।'
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राहुल शेवाले ने पत्र में आगे लिखा- ‘औरंगजेब के मकबरे को वर्तमान में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थल के रूप में मान्यता मिली हुई है। इस कब्र को हटाने की व्यापक मांग के बावजूद राज्य सरकार कोई कार्रवाई करने में असमर्थ है, क्योंकि ये स्थल ASI के अधिकार क्षेत्र में आता है। प्रावधानों के अनुसार, ऐसे किसी भी स्मारक को सूची से हटाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। मैं आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि आप इस मामले पर गौर करें और संबंधित अधिकारियों को औरंगजेब के मकबरे को राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों की सूची से हटाने का निर्देश दें।’
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