'सुनवाई के दौरान जज पर फेंके कागज, फिर CJI पर की अभद्र टिप्पणी...', सुप्रीम कोर्ट में युवक ने किया हाई वोल्टेज ड्रामा

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप सिंह ने जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और आलोक अराधे की बेंच के सामने सुनवाई के दौरान जजों को आदेश देने की कोशिश की। उन्होंने फाइलें फेंकी, गालियां दीं और मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अपशब्द कहे।

  • Facebook Share Icon
  • Twitter Share Icon
  • WhatsApp Share Icon
 
Follow : Google News Icon
'Mr Judicial Servant, I Order You...': Man Flings Papers, Abuses CJI, Sparks High Drama In Supreme Court With His Astonishing Outburst | VIDEO
CJI पर की अभद्र टिप्पणी | Image: X

सुप्रीम कोर्ट के कोर्टरूम में एक असामान्य घटना सामने आई। पार्टी इन पर्सन पेश हुए याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप सिंह ने सुनवाई के दौरान जजों को आदेश देने की कोशिश की, केस की फाइलें हवा में फेंकीं और मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अपशब्द कहे। सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें जबरन कोर्टरूम से बाहर निकाल दिया।

जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई चल रही थी। याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप सिंह खुद अपनी पैरवी कर रहे थे। सुनवाई शुरू होते ही उन्होंने जजों को संबोधित करते हुए कहा, “न्यायिक अधिकारी महोदय, मैं आपको आदेश देता हूं कि लखनऊ के ACP विकास नगर के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दें।”

जस्टिस विश्वनाथन ने हैरानी जताते हुए पूछा, “आप हमें आदेश दे रहे हैं?” इसके जवाब में याचिकाकर्ता ने कहा, “मेरी तरफ से बस इतना ही। सब कुछ रिकॉर्ड पर है।” इसके तुरंत बाद उन्होंने केस की फाइलें बेंच की तरफ उछाल दीं और गाली-गलौज शुरू कर दी। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के खिलाफ अपशब्द कहे और कहा कि “इसे CJI को दे देना”।

बुरी तरह घबरा गई महिला वकील

इस पूरे ड्रामे के बाद कोर्टरूम में अचानक सन्नाटा छा गया। पीछे बैठी एक महिला वकील बुरी तरह घबरा गई। बेंच ने तुरंत सुरक्षा कर्मियों को निर्देश दिया और याचिकाकर्ता को माइक से हटाकर जबरन कोर्टरूम से बाहर निकाल दिया गया।

Advertisement

जजों की प्रतिक्रिया

हंगामे के बाद जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता बहुत परेशान और हताश दिख रहा है। उन्होंने कहा, “हमें उसके लिए केवल सहानुभूति है। हम उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते।”

याचिका खारिज

बेंच ने याचिका पर विचार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई ठोस आधार नहीं पाया और याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता के खिलाफ तत्काल कोई अवमानना की कार्रवाई नहीं की गई।

Advertisement

यह घटना सुप्रीम कोर्ट में अदालत की गरिमा बनाए रखने को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बनी है। अदालत ने याचिकाकर्ता की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सहानुभूति दिखाई, लेकिन कोर्टरूम में इस तरह की अशोभनीय हरकतें कभी स्वीकार्य नहीं मानी जातीं।

ये भी पढ़ें: "हम ट्रंप को मार देंगे...", ट्रंप की हत्या की साजिश रच रहा ईरान, इजरायली खुफिया एजेंसी ने अमेरिका को दी चेतावनी

Published By:
 Sagar Singh
पब्लिश्ड