दिल्ली के न्यू अशोक नगर में अचानक क्यों बंद हुई सैकड़ों दुकानें? शटर हटाकर खड़ी की गई दीवारें, रातों-रात बदल गया पूरा इलाका

Delhi News: अब तक इस इलाके में करीब कई दुकानें और रेस्तरां बंद हो चुके हैं। जिन मकान मालिकों ने अपनी संपत्तियां किराए पर दी हुई थीं, उन्होंने किराएदारों को तत्काल खाली कराना शुरू कर दिया।

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Delhi New Ashok Nagar
न्यू अशोक नगर में क्यों बंद हुई दुकानें? | Image: Republic

Delhi New Ashok Nagar: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा रिहायशी इलाकों में संपत्तियों के व्यावसायिक दुरुपयोग की जांच के लिए शुरू किए गए सर्वे ने पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर में हड़कंप मचा दिया है। सर्वे में नाम दर्ज होने और सीलिंग की कार्रवाई के भय से यहां के दुकानदारों और रेस्तरां मालिकों ने खुद ही अपने दुकानों को बंद करना शुरू कर दिया है। कुछ ने तो दुकान के दरवाजे और शटर तक उखाड़कर वहां दीवारें खड़ी कर दी हैं।

900 मीटर की सड़क पर पसरा सन्नाटा

न्यू अशोक नगर की वह मुख्य सड़क, जो दिल्ली को नोएडा से जोड़ती है और जिसके एक छोर पर मेट्रो स्टेशन है, वे कभी रौनक से भरी रहती थी। इस करीब 900 मीटर लंबी सड़क के दोनों किनारों पर बसे रिहायशी मकानों के निचले हिस्सों में सालों से दुकानें और रेस्तरां चल रहे थे। कपड़े, किराना, दवाइयां, स्टेशनरी, गिफ्ट शॉप, वाहन मरम्मत की दुकानें और खाने-पीने के ठिकाने- सब कुछ यहां था।

पिछले कुछ दिनों से इस सड़क पर एक अजीब खामोशी छा गई है। दुकानों के शटर बंद हैं, कहीं-कहीं तो जहां दुकान हुआ करती थी, वहां ताजी पुती हुई दीवारें नजर आ रही हैं।

सैकड़ों दुकानें हुई बंद

अब तक इस इलाके में करीब कई दुकानें और रेस्तरां बंद हो चुके हैं। जिन मकान मालिकों ने अपनी संपत्तियां किराए पर दी हुई थीं, उन्होंने किराएदारों को तत्काल खाली कराना शुरू कर दिया। दुकान का कोई सबूत न रह जाए, इसके लिए शटर और दरवाजे हटाकर उनकी जगह चिनाई कराई जा रही है और दीवारों पर रंग-रोगन किया जा रहा है।

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इसका सबसे बड़ा खामियाजा उन कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है जो इन दुकानों और रेस्तरां में काम करते थे। सैकड़ों लोगों का रोजगार एक झटके में छिन गया है। इलाके में जरूरी सामान की दुकानें बंद होने से स्थानीय निवासियों को भी परेशानी हो रही है और अब उन्हें ऑनलाइन ऑर्डर का सहारा लेना पड़ रहा है।

अवैध रूप से संचालित दुकानों के मालिक और उनमें काम करने वाले कर्मचारी इस कार्रवाई से नाराज हैं। उनका कहना है कि यह कारोबार सालों से बिना किसी रोक-टोक के चलता आ रहा था। तब ऐसे में अचानक सर्वे और सीलिंग की नोटिस क्यों?

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पार्षद की व्यापारियों से अपील

हालांकि स्थानीय पार्षद और MCD की लाइसेंसिंग कमेटी के चेयरमैन संजीव सिंह ने अपील की है कि व्यापारी शांति बनाए रखें। उन्होंने कहा कि सर्वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए किया जा रहा है और निगम इस बात पर विचार कर रहा है कि व्यापारियों का कारोबार किसी न किसी रूप में जारी रह सके।

क्यों हो रही कार्रवाई? 

दरअसल, दिल्ली के रिहायशी इलाकों में बड़े पैमाने पर मकानों के निचले हिस्सों को व्यावसायिक उपयोग में लाया जा रहा है, जो कि नगर निगम के नियमों का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर MCD ऐसी संपत्तियों की पहचान के लिए सर्वे चला रही है। जो संपत्तियां नियमों के खिलाफ पाई जाएंगी, उन पर सीलिंग की कार्रवाई हो सकती है।

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