Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर भी चक्रवात 'अर्नब' का साया, दिल्‍ली-NCR सहित इन जगहों पर सुहागिनों को खूब इंतजार कराएगा चांद

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाए जाने वाले सुहाग के पावन पर्व करवा चौथ को लेकर सुहागिनों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र की कामना के लिए रखा जाने वाला यह निर्जला व्रत इस बार मौसम के बदले मिजाज के कारण चर्चा में है।

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करवा चौथ पर भी चक्रवात 'अर्नब' का साया, दिल्‍ली-NCR सहित इन जगहों पर सुहागिनों को खूब इंतजार कराएगा चांद | Image: X

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाए जाने वाले सुहाग के पावन पर्व करवा चौथ को लेकर सुहागिनों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र की कामना के लिए रखा जाने वाला यह निर्जला व्रत इस बार मौसम के बदले मिजाज के कारण चर्चा में है। बंगाल की खाड़ी से उठे एक चक्रवाती तूफान अर्नब और उत्तर भारत में छाए बादलों की आशंका के चलते इस बार चांद के दीदार का इंतजार थोड़ा लंबा हो सकता है।

मौसम विभाग और मौसमी आकलन के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवात का प्रभाव देश के कई हिस्सों के साथ-साथ उत्तर भारत के मैदानी इलाकों पर भी पड़ सकता है। राजधानी दिल्ली सहित गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम और मेरठ में आसमान में घने काले बादल छाए रहने की आशंका है।

बारिश की संभावना: कुछे एक इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी भी हो सकती है। बादलों की मौजूदगी के कारण करवा चौथ की शाम को चांद समय पर नजर आने में बाधा आ सकती है, जिससे महिलाओं को चंद्र दर्शन के लिए सामान्य से अधिक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है।

दिल्ली और प्रमुख क्षेत्रों में चंद्रोदय का समय

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राजधानी दिल्ली में करवा चौथ के दिन चंद्रमा के निकलने का अनुमानित समय इस प्रकार है:

दिल्ली में चांद निकलने का समय: रात लगभग 8:17 बजे

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व्रत खोलने की प्रक्रिया: चंद्र दर्शन के बाद महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं, छलनी से पति का चेहरा देखती हैं और फिर पति के हाथ से जल ग्रहण कर अपना उपवास संपन्न करती हैं।

करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त

धार्मिक अनुष्ठानों और पंचांग के अनुसार करवा चौथ की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष पूजा के लिए सबसे उत्तम समय निम्नलिखित रहेगा:

पूजा की कुल अवधि: शाम 5:38 बजे से शाम 6:56 बजे तक (लगभग 1 घंटा 18 मिनट)

पूजनीय देवी-देवता: इस समयावधि में महिलाएं विधि-विधान से भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा-अर्चना कर सकती हैं।

व्रत कथा: पूजा के दौरान करवा चौथ की व्रत कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा है, जो पारिवारिक सुख-शांति और अखंड सौभाग्य का प्रतीक है।

व्रत से जुड़ी जरूरी बातें और सावधानियां

सरगी का समय: व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में सरगी खाकर की जाती है।

स्वास्थ्य का ध्यान: निर्जला व्रत रखते समय गर्भवती महिलाओं या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को अपनी शारीरिक स्थिति का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

मौसम से तालमेल

यदि आसमान में घने बादलों के कारण चांद समय पर दिखाई न दे, तो पंचांग में दिए गए चंद्रोदय के मानक समय को आधार मानकर बुजुर्गों या पंडितों की सलाह से पूजा की औपचारिकताएं पूरी की जा सकती हैं।

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Published By:
 Ankur Shrivastava
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