क्या केजरीवाल पर भी आएगी क्लासरूम घोटाले की आंच? सिसोदिया-सत्येंद्र पर FIR के बाद BJP बोली- CM होने के नाते...

वीरेंद्र सचदेवा कहते हैं कि 2015 में AAP की सरकार आने के बाद से ही अरविंद केजरीवाल ने इस बात की नींव रखनी शुरू कर दी थी कि भ्रष्टाचार कैसे किया जाएगा।

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Arvind Kejriwal/ Virendra Sachdeva
वीरेंद्र सचदेवा ने केजरीवाल पर आरोप लगाए. | Image: ANI/PTI

Delhi News: दिल्ली के तथाकथित क्लास रूम घोटाले में पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया और पूर्व PWD मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ मुकदमा हुआ है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने आम आदमी पार्टी के नेताओं पर FIR दर्ज की। इसके बाद दिल्ली की सियासत गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी कह रही है कि उस समय के मुख्यमंत्री होने के नाते अरविंद केजरीवाल की भूमिका की भी जांच होने चाहिए।

बीजेपी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कथित क्लास रूम घोटाले पर प्रतिक्रिया दी है और कहा- 'दिल्ली बीजेपी हमेशा से AAP की भ्रष्ट नीतियों का विरोध करती रही है। आज AAP और उनकी सरकार के भ्रष्टाचार के लिए बहुत निर्णायक दिन है। हमने कई बार अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के काले कारनामों को उजागर किया है। लेकिन आज जब दिल्ली एसीबी ने क्लासरूम निर्माण को लेकर मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। हम इसमें अरविंद केजरीवाल की भूमिका की जांच की भी मांग करते हैं।'

वीरेंद्र सचदेवा ने केजरीवाल पर और भी आरोप लगाए

वीरेंद्र सचदेवा आगे कहते हैं- '2015 में AAP की सरकार आने के बाद से ही अरविंद केजरीवाल ने इस बात की नींव रखनी शुरू कर दी थी कि भ्रष्टाचार कैसे किया जाएगा। 2015-16 में अरविंद केजरीवाल ने 12748 क्लासरूम के लिए 2982 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया, जिसका मतलब है कि प्रति क्लासरूम 24,86,000 का आवंटन, जबकि सीपीडब्ल्यूडी मैनुअल के अनुसार एक क्लासरूम की कीमत 5 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। जब ​​ऐसा हुआ तो हमारे तीनों नेताओं ने एसीबी में शिकायत की थी, लेकिन सरकार AAP की थी, इसलिए 7-8 साल तक मामला दबा रहा। बीजेपी संघर्ष करती रही।'

क्या है क्लास रूम घोटाला?

दिल्ली में AAP सरकार ने 12748 क्लासरूम्स के निर्माण में प्रोजेक्ट शुरू किया था। प्रोजेक्ट में लगभग 2,892 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यहां प्रति क्लासरूम लगभग 24.86 लाख रुपये खर्च किए गए, जबकि सामान्य रूप से ऐसे क्लासरूम 5 लाख रुपये प्रति रूम खर्च आता। प्रोजेक्ट 2015-16 में मंजूर हुआ था और इसे जून 2016 तक पूरा किया जाना था। लेकिन न सिर्फ काम समय पर पूरा नहीं हुआ, बल्कि लागत में भी भारी इजाफा हुआ।

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सेंट्रल विजिलेंस कमिशन (CVC) की तकनीकी जांच रिपोर्ट फरवरी 2020 में आई थी, जिसमें प्रोजेक्ट में भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की बात कही गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, क्लासरूम की लागत पक्के निर्माण जितनी ही आ गई थी, जबकि बनाए गए क्लासरूम केवल 30 साल की उम्र वाले सेमी-पर्मानेंट स्ट्रक्चर थे। जांच में पता चला है कि कई स्कूलों में 42.5 करोड़ रुपये का काम बिना किसी टेंडर के करवा दिया गया। वहीं, 860.63 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन लागत में 17% से 90% तक की बढ़ोतरी कर दी गई। इससे करीब 326.25 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत आई, जिसमें से 205.45 करोड़ रुपये केवल 'रिच स्पेसिफिकेशन' के चलते बढ़े।

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Published By:
 Dalchand Kumar
पब्लिश्ड