अदालत ने AAP के पूर्व विधायक ऋतुराज झा के खिलाफ आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से किया इनकार

ऋतुराज गोविंद झा ने पार्षद रवींद्र भारद्वाज और आम आदमी पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ 24 मार्च 2024 को आचार संहिता लागू होने के दौरान विरोध प्रदर्शन किया।

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Former AAP MLA Rituraj Jha
पूर्व AAP विधायक ऋतुराज गोविंद झा | Image: X

Delhi News: दिल्ली की एक अदालत ने मार्च 2024 में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस के आदेश की कथित अवहेलना करने के मामले में आम आदमी पार्टी ‘आप’ के पूर्व विधायक ऋतुराज गोविंद झा और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने कहा कि यदि यह मान भी लिया जाए कि उन्होंने आदेश की अवहेलना की है तो भी ऐसी अवज्ञा से किसी को कोई बाधा, परेशानी या चोट नहीं पहुंची है।

न्यायाधीश ने 21 फरवरी को पारित आदेश में कहा, ‘‘ अगर यह मान भी लिया जाए कि आरोपी व्यक्तियों ने एसीपी, अमन विहार के आदेश की अवहेलना की है तो ऐसा नहीं दिखाया गया है कि ऐसी अवज्ञा से कानूनी रूप से कार्यरत किसी भी व्यक्ति को बाधा, परेशानी या चोट का खतरा पैदा हुआ हो। चूंकि पुलिस रिपोर्ट से अपराध का कोई मामला नहीं बनता है, इसलिए यह अदालत अपराध का संज्ञान लेने से इनकार करती है।’’

ऋतुराज गोविंद झा ने पार्षद रवींद्र भारद्वाज और आम आदमी पार्टी (आप) के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ 24 मार्च, 2024 को आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) लागू होने के दौरान विरोध प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री तथा प्रवर्तन निदेशालय का पुतला फूंकने की कोशिश की। आरोपियों को पुलिस के आदेश की अवहेलना करने के आरोप में हिरासत में लिया गया और उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा) के तहत मामला दर्ज किया गया। न्यायाधीश ने जांच में देरी के लिए जांच अधिकारी को फटकार भी लगाई।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यह अदालत इस मामले में प्रवर्तन एजेंसियों और विशेष रूप से दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली को समझने में विफल रही है। सबसे पहले पुलिस रिपोर्ट में कथित अपराध के तत्वों का उल्लेख नहीं किया गया है। जैसा कि ऊपर कहा गया है , वर्तमान पुलिस रिपोर्ट प्रथम दृष्टया यह दिखाने में भी विफल रही है कि किस तरह से भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध किया गया और प्राथमिकी दर्ज करने से पहले जांच अधिकारी ने कोई प्रारंभिक जांच या कानूनी राय नहीं ली।’’ न्यायाधीश ने कहा कि जांच अधिकारी को पर्याप्त साक्ष्य जुटाने चाहिए थे और कानूनी राय लेनी चाहिए थी।

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Published By :
Dalchand Kumar
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