Unnao Rape Case: कुलदीप सेंगर को फिर झटका, रेप पीड़ित के पिता की हिरासत में मौत मामले में 10 साल की सजा सस्पेंड करने से HC का इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव बलात्कार पीड़ित के पिता की हिरासत में मौत के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने 10 साल की सजा निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता और जनता के विश्वास को ध्यान में रखते हुए राहत से इनकार किया। सेंगर फिलहाल जेल में ही रहेंगे।
- भारत
- 2 min read

Kuldeep Singh Sengar : दिल्ली हाईकोर्ट से पूर्व BJP विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा झटका लगा है। उन्नाव रेप केस पीड़ित के पिता की पुलिस हिरासत में मौत से जुड़े केस में कुलदीप सिंह सेंगर की उस याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 10 साल की कठोर कारावास की सजा को निलंबित करने की मांग की थी।
यह मामला 2018 में पीड़ित के पिता की हिरासत में हुई मौत से संबंधित है। ट्रायल कोर्ट ने मार्च 2020 में कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी और 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर और पांच अन्य लोगों को भी इसी सजा का सामना करना पड़ा। अदालत ने कहा था कि परिवार के एकमात्र कमाने वाले की मौत के लिए कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।
क्या है पूरा मामला?
उन्नाव रेप कांड 2017 में का है। एक नाबालिग लड़की ने कुलदीप सिंह सेंगर पर अपहरण कर रेप करने का आरोप लगाया था। इसके बाद अप्रैल 2018 में पीड़ित के पिता को शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया। हिरासत में पुलिस की बेरहमी के कारण उनकी मौत हो गई। यह घटना देशभर में बड़े विवाद का कारण बनी थी।
सेंगर इस मामले में अप्रैल 2018 से ही जेल में है। वो रेप मामले में उम्रकैद की सजा भी काट रहे हैं। दिसंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने बलात्कार केस में उनकी सजा निलंबित की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी।
Advertisement
AIIMS में कराना चाहते हैं इलाज
इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 2019 में सेंगर को 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। सेंगर ने जेल में खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए सजा निलंबन की मांग की के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन सीबीआई और पीड़ित ने इसका कड़ा विरोध किया। सेंगर ने दलील दी थी कि वो लंबे समय से जेल में बंद हैं और उनकी सेहत भी लगातार खराब हो रही है। याचिका में कहा गया कि डायबिटीज, मोतियाबिंद और रेटिना डिटैचमेंट जैसी बीमारियों का AIIMS में इलाज कराना है।
जस्टिस रविंदर डुडेजा की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की दलीलें सुनने सुनी और मंगलवार को अपना फैसला सुनाते हुए सजा निलंबन की याचिका खारिज करदी।