ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों की जानकारी छिपाई गई? आरोपों पर रक्षा मंत्रालय का आ गया बयान, नेशनल वॉर मेमोरियल पर लिखा गया जवानों का नाम

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद जवानों के नाम छिपाने के आरोपों को रक्षा मंत्रालय ने सिरे से नाकार दिया है। मंत्रालय ने कहा कि इस मुद्दे पर अनावश्यक विवाद खड़ा होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसी गलत खबरें तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करती हैं।

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Defence Ministry Clarification
आरोपों पर रक्षा मंत्रालय की सफाई | Image: ANI, Republic

Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वीरगति प्राप्त करने वाले देश के जांबाज जवानों के नाम सार्वजनिक करने और नेशनल वॉर मेमोरियल पर अंकित किए जाने पर नया विवाद छिड़ गया है। सरकार पर शहीद जवानों की जानकारी छिपाए जाने के आरोप लगे, जिस पर अब रक्षा मंत्रालय की सफाई आई है। मंत्रालय ने साफ किया कि यह पहली बार नहीं जब शहीद जवानों के बलिदान को मान्यता दी गई हो। पहले भी उनके बलिदान को नमन किया गया है।

मंत्रालय ने जारी किया बयान

रक्षा मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज कर कहा, “मीडिया और सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी खबरें चल रही हैं जिनमें गलत तरीके से यह कहा गया है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान छह बहादुर सैनिकों की सर्वोच्च शहादत को हाल ही में पहली बार मान्यता दी गई या सार्वजनिक रूप से सामने लाया गया। यह स्पष्ट किया जाता है कि देश ने इन शहीद नायकों को उन खबरों के आने से बहुत पहले ही, सबसे पहले संभव अवसर पर श्रद्धांजलि दी थी।”

मंत्रालय ने बताया कि 11 मई 2025 को आयोजित आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तत्कालीन मिलिट्री ऑपरेशन्स के महानिदेशक ने इन बहादुर सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी और विशेष रूप से 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान ड्यूटी पर उनके बलिदान को मान्यता दी। इन बहादुर सैनिकों को वीरता पुरस्कार दिए गए और इसकी जानकारी 14 अगस्त, 2025 की प्रेस विज्ञप्ति में प्रकाशित की गई थी। यह भारतीय रक्षा बलों की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप उनकी वीरता और सर्वोच्च बलिदान की औपचारिक और राष्ट्रीय मान्यता थी। भारतीय सेना के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी बिना किसी देरी के इन बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद भी देश इन नायकों को सम्मान देता रहा है।

बयान में आगे कहा गया कि 15 जनवरी, 2026 को जयपुर में आयोजित सेना दिवस परेड के दौरान सेना प्रमुख ने इनमें से तीन बहादुर सैनिकों के परिवारों को सेना मेडल (वीरता) प्रदान किए। वहीं वायु सेना प्रमुख ने 8 अक्टूबर 2025 को एक समारोह में ऐसा ही किया।

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अनावश्यक विवाद खड़ा होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण- मंत्रालय

मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीद सैनिकों के नाम अंकित करने की प्रक्रिया एक स्थापित और स्पष्ट प्रोटोकॉल के तहत की जाती है। यह कहना कि उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तथ्यात्मक रूप से गलत है।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस मुद्दे पर अनावश्यक विवाद खड़ा होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसी गलत खबरें न सिर्फ तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करती हैं, बल्कि शहीद परिवारों को अनावश्यक दुख पहुंचाती हैं और उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने का जोखिम पैदा करती हैं।

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मंत्रालय ने मीडिया और सोशल मीडिया से अपील की है कि शहीद सैनिकों से जुड़ी खबरों में पूरी जिम्मेदारी और संयम बरतें और  बिना पुष्टि के कोई जानकारी न फैलाएं।

विपक्ष उठा रहा था सवाल

दरअसल, विपक्षी पार्टियों ने इस पर सवाल उठाए थे। शनिवार (27 जून) को कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान छह जवानों के बलिदान के बारे में जानकारी छिपाकर सैनिकों का अपमान किया गया है। इस विषय पर देश की संसद को भी गुमराह किया गया।

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Published By:
 Ruchi Mehra
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