यूपी तक चक्रवात 'अर्नब' का असर, कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना... एक्सपर्ट बोले- घर से निकलने से पहले जान लें मौसम का ताजा अपडेट

चक्रवात 'अर्नब' का असर उत्तर प्रदेश के कानपुर और प्रयागराज तक पहुंच गया है। IIT कानपुर के प्रोफेसर जावेद एन. मलिक ने बताया कि यह कैटेगरी-4 का चक्रवात था, जिसकी लैंडफॉल के समय हवा की रफ्तार 120 से 220 किमी प्रति घंटा थी। हालांकि आगे बढ़ने पर इसकी तीव्रता घटेगी, फिर भी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बाहरी इलाकों में 40 से 45 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। इतनी तेज हवाओं और बारिश से पेड़ गिरने, बिजली व्यवस्था बाधित होने और यातायात प्रभावित होने की आशंका है।

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यूपी तक चक्रवात 'अर्नब' का असर, कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना... एक्सपर्ट बोले- घर से निकलने से पहले जान लें मौसम का ताजा अपडेट
यूपी तक चक्रवात 'अर्नब' का असर, कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना... एक्सपर्ट बोले- घर से निकलने से पहले जान लें मौसम का ताजा अपडेट | Image: X

मौसम के बदलते मिजाज और चक्रवाती तूफान का असर अब उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। साइक्लोन अर्नब के संभावित प्रभाव को लेकर IIT कानपुर के अर्थ साइंसेज विभाग के प्रोफेसर जावेद एन. मलिक ने महत्वपूर्ण जानकारी और चेतावनी साझा की है।

कानपुर और प्रयागराज तक बादलों का फैलाव

प्रोफेसर जावेद एन. मलिक के अनुसार, चक्रवात से जुड़े बादलों का फैलाव कानपुर और प्रयागराज तक दर्ज किया गया है। राहत की बात यह है कि जैसे-जैसे यह चक्रवात आगे बढ़ेगा, इसकी तीव्रता में कमी आने का अनुमान है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के बाहरी और मैदानी इलाकों में चलने वाली तेज हवाएं आम जनजीवन के लिए परेशानियां खड़ी कर सकती हैं।

हवा की रफ्तार और चक्रवात की श्रेणी

लैंडफॉल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करते हुए प्रोफेसर मलिक ने बताया कि हवा की रफ्तार लगभग 220 किलोमीटर प्रति घंटे दर्ज की गई थी। यह कैटेगरी-4 का चक्रवात था। इसकी तुलना उन्होंने अक्टूबर 1999 के ओडिशा सुपर साइक्लोन और 2014 के चक्रवात 'हुदहुद' से की। चक्रवात के केंद्र के आसपास हवा की गति लगभग 120 किलोमीटर प्रति घंटे रही, जिसमें आगे चलकर गिरावट आने की संभावना है।

तेज हवाओं से संभावित खतरे और अलर्ट

प्रोफेसर ने मध्य प्रदेश और रायपुर के आसपास 40 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान जताया है। उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती व बाहरी इलाकों के लिए चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि इतनी रफ्तार की हवाएं पेड़ उखाड़ने और बिजली के पोल/लाइनों को क्षति पहुंचाने के लिए काफी हैं। तेज हवाओं और बारिश के कारण सड़क यातायात बाधित हो सकता है। साथ ही विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ में भी रुकावट आ सकती है।

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28 को इन जिलों में बदलेगा मौसम

मौसम विभाग के मुताबिक, 28 अक्टूबर को सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, जौनपुर और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं।  इन इलाकों में हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।  कुछ स्थानों पर बारिश भी हो सकती है। 29 अक्टूबर को मौसम का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है. सोनभद्र और आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका जताई गई है। वहीं चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संत रविदास नगर यानी भदोही, जौनपुर और आसपास के इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा बांदा, फतेहपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या और अंबेडकरनगर में भी बारिश की संभावना है. इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं।

मौसम विभाग ने कई इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान जताया है।  30 अक्टूबर को भी प्रदेश के कई जिलों में मौसम खराब रह सकता है. बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ और बलिया में बारिश और तेज हवाओं की संभावना है. इसके साथ ही देवरिया, गोरखपुर, संत कबीरनगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा और बलरामपुर में भी मौसम का असर दिख सकता है। कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या और अंबेडकरनगर में भी गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और बारिश होने का अनुमान है। हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर में भी मौसम बदल सकता है. इन क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।

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चक्रवात बनने के कारण और वैज्ञानिक पहलू

चक्रवात के बनने की प्रक्रिया पर रोशनी डालते हुए प्रोफेसर मलिक ने बताया कि इसमें कम वायुदाब, तापमान का अंतर और पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न 'कोरिऑलिस प्रभाव' मुख्य भूमिका निभाते हैं। जब अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं, तो हवाओं का परिसंचरण तेजी से विकसित होकर चक्रवात का रूप ले लेता है।उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण बढ़ रही चरम मौसमी घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की। वहीं नेपाल की हालिया स्थिति से तुलना पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वहां की भौगोलिक संरचना अलग है, इसलिए दोनों स्थितियों की सीधी तुलना नहीं की जानी चाहिए।

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Published By:
 Aarya Pandey
पब्लिश्ड