Haryana: 'बेटा, मैं दरिंदों से हार गया...', सिरसा जिला जेल वार्डन ने आत्महत्या से पहले लिखे 2 सुसाइड नोट, DSP समेत 2 अधिकारियों पर आरोप

हरियाणा में सिरसा जिला जेल के वार्डन सुखदेव सिंह ने सल्फास खाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में DSP और LO पर 15 दिनों तक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जानें क्या था पूरा मामला?

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Sirsa jail warden suicide
सिरसा जिला जेल वार्डन ने की आत्महत्या | Image: Pixabay

ललित शर्मा की रिपोर्ट 

Sirsa jail warden suicide: हरियाणा के सिरसा जिला जेल में तैनात वार्डन सुखदेव सिंह ने कथित मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली है। उन्होंने 1 जनवरी 2026 को घर पर सल्फास निगल लिया, जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। सुखदेव सिंह ने दो सुसाइड नोट छोड़े, जिनमें जेल के DSP (सिक्योरिटी) और LO पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। 

सुसाइड नोट के मुताबिक, 14 दिसंबर को उन्होंने अपनी दिल की बीमारी (दो स्टेंट लगे होने) के कारण रात की ड्यूटी न लगाने की गुहार लगाई, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें लगातार 15 दिनों तक तंग किया। 31 दिसंबर को भी बुरा-भला कहा गया। नए साल पर उन्होंने सुपरिंटेंडेंट के सामने माफी मांगी, फिर भी ड्यूटी में खड़ा रखा गया और परेशान किया। सुखदेव ने बेटे को फोन कर कहा- 

'मैं इन दरिंदों से हार गया, अपना और मां का ख्याल रखना।' 

नोट जेल महानिदेशक, सुपरिंटेंडेंट, डीसी और एसपी सिरसा के नाम लिखे गए। परिवार ने आरोप लगाया कि मृतक सुखदेव सिंह को जातिसूचक गालियां भी दी गईं। परिजनों ने हुडा पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई है।

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क्या है पूरा मामला? 

सिरसा जिला जेल के वार्डन सुखदेव सिंह ने सुसाइड करने से पहले 2 सुसाइड नोट छोड़े, जिसमें उन्होंने DSP समेत 2 अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि मुझे ड्यूटी लगाने को लेकर इन्होंने मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का दबाव बनाया। इसी तनाव को लेकर जेल वार्डन ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली है। इसके बाद भी जेल वार्डन के परिवार ने सिरसा पुलिस पर इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। फिलहाल हुड्डा पुलिस मामले की तफ्तीश में जुट गई है।

मृतक के परिजनों ने जेल के डीएसपी सहित 2 अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर इस मामले में सिरसा पुलिस ने आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की तो शव नहीं लेंगे।

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जान देने से पहले बेटे को किया फोन

सुसाइड से पहले वार्डन ने अपने बेटे को फोन भी किया। उसने कहा कि दोनों अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर मैं जहरीला पदार्थ खा रहा हूं। मेरे बैग में जेल महानिदेशक और जेल सुपरिटेंडेंट के नाम लिखा सुसाइड नोट रखा है। मैं इन दरिंदों से हार गया। अपना और मां का ख्याल रखना। वार्डन के परिवार ने हुडा चौकी में दोनों अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दी है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

हार्ट पेशेंट थे, गालियां दी, इसलिए ये कदम उठाया- बेटा

मृतक जेल वार्डन सुखदेव के बेटे जसपाल और पिता दीप सिंह ने बताया कि “गुरुवार (1 जनवरी) शाम 5 बजे मेरे पास पिता का फोन आया। तब उन्होंने सल्फास निगल ली थी। उन्होंने DSP और LO को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया। मैं अपने परिवार के साथ एक घंटे में मौके पर पहुंच गया। बेटे ने बताया कि पहले पिता को सिविल अस्पताल ले गए। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राइवेट अस्पताल में ले गए। रात को उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। सूचना मिलते ही सुपरिंटेंडेंट भी मौके पर आ गए। दोनों अधिकारी उन्हें बहुत परेशान कर रहे थे। मेरे पिता हार्ट पेशेंट हैं, उन्हें 2 स्टंट डले हुए हैं। सुखदेव के बेटे ने आरोप लगाया कि इसके बाद पिता को जातिसूचक गालियां दी गईं। इसलिए पिता ने यह कदम उठा लिया।”

पहले सुसाइड नोट में क्या लिखा? 

जेल महानिदेशक, हरियाणा कारागार विभाग, पंचकूला, डीसी सिरसा और पुलिस सुपरिटेंडेंट सिरसा के नाम लिखे सुसाइड नोट में सुखदेव सिंह ने लिखा- ‘श्रीमान, मैं पिछले 7 साल से जिला जेल सिरसा में वार्डन के पद पर कार्यरत हूं। मैं पिछले 6 साल से दिल की बीमारी से पीड़ित हूं। 14 दिसंबर को मैंने पुलिस उप सुपरिंटेंडेंट सिक्योरिटी से अनुरोध किया कि मेरी रात की ड्यूटी न लगाई जाए, जिस पर वे भड़क गए और मुझसे कहने लगे कि, आपको कोट मीना दीवार के नीचे ही रखेंगे। उन्होंने लगातार 15 दिन तक मुझे तंग किया। 31 दिसंबर, 2025 को फिर शाम 6 बजे उन्होंने मुझे बुरा-भला कहा। मैंने नए साल पर जेल सुपरिटेंडेंट के सामने, अपनी गार्ड के सामने माफी मांगी। इसके बाद एलओ और डीएसपी आए और सारा दिन मुझे ड्यूटी में खड़ा रखा और मुझे ड्यूटी पर लेने से इनकार कर दिया।'

दूसरे सुसाइड नोट में क्या लिखा?

दूसरे नोट में सुखदेव ने लिखा- 'जेल सुपरिटेंडेंट महोदय, मैं आज सुबह आपके निवास पर नए साल की मुबारकबाद देने आया और तमाम गार्ड के सामने माफी मांगी। सभी गार्ड ने आपसे मुझे माफ करने की मिन्नत की, जिसे आपने स्वीकार कर लिया। फिर भी एलओ ने मुझे ड्यूटी पर नहीं लिया और सारा दिन खड़ा रखा गया। अब शाम को निराश होकर मैं इन दोनों अधिकारियों से तंग आकर आत्महत्या जैसा कदम उठा रहा हूं। डीएसपी और एलओ ने 15 दिन से मुझे परेशान किया। सर, मैं आपसे दोबारा माफी मांगता हूं। मुझे माफ करें और मुझे इंसाफ दिलाना, सर आपकी मेहरबानी होगी। प्रार्थी, सुखदेव।' 

फिलहाल इस मामले को लेकर सिरसा पुलिस मीडिया को कुछ भी बताने से बचती नजर आ रही है।   

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Published By:
 Sagar Singh
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