अपडेटेड 7 February 2025 at 17:35 IST
दिल्ली पुलिस ने Digital Arrest गैंग का किया पर्दाफाश, डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट के 5 भारतीय गुर्गे गिरफ्तार
Digital Arrest: दिल्ली पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट गैंग का पर्दाफाश किया। दिल्ली पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट के 5 भारतीय गुर्गों को गिरफ्तार किया।
- भारत
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Digital Arrest Scam: दिल्ली पुलिस ने एक चीनी कंपनी के लिए काम करने वाले पांच भारतीय गुर्गों वाले एक डिजिटल गिरफ्तारी सिंडिकेट को पकड़ा है। शिकायतकर्ता की उम्र 81 साल है। उनके साथ हुए धोखाधड़ी के मामले में ही दिल्ली पुलिस ने बड़ा एक्श लेते हुए चीनी कंपनी में काम करने वाले डिजिटल अरेस्ट के भारतीय गुर्गों के सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया।
दरअसल, 8 दिसंबर 2024 को द्वारका नई दिल्ली निवासी गोपाल ने 15 लाख रुपये के डिजिटल गिरफ्तारी और धोखाधड़ी लेनदेन की राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज किए जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने बताया कि साइबर पुलिस स्टेशन दक्षिण पश्चिम जिले की एक टीम ने चार आरोपियों इमरान कुरैशी असद कुरैशी देव सागर और जावेद को पहाड़गंज क्षेत्र से गिरफ्तार किया।
आरोपियों के पास से 11 स्मार्टफोन, 6 ATM और एक लैपटॉप मिला
दिल्ली पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी अभिषेक यादव को झांसी यूपी से गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही टीम ने आरोपियों के पास से 11 स्मार्टफोन 6 एटीएम एक लैपटॉप और कई बैंक खातों की चेकबुक भी जब्त की।
HC ने डिजिटल अरेस्ट संबंधित याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा
इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को डिजिटल अरेस्ट जैसे नए युग के साइबर अपराधों के खिलाफ एक जनहित याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने केंद्र को चार सप्ताह का समय दिया और अगली सुनवाई 19 मार्च के लिए तय की।
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2024 में भी केंद्र और राज्य सरकार को भेजा था नोटिस
जजों की पीठ ने कहा, "भारत संघ द्वारा चार सप्ताह के भीतर हलफनामा/जवाब दाखिल किया जाए। उसके बाद दो सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर दाखिल किया जाए।" नोटिस जारी करते हुए हाईकोर्ट ने 2024 में केंद्र, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और भारतीय रिजर्व बैंक को याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा था।
जनहित याचिका में साइबर अपराधों के खिलाफ जागरूकता पैदा करने और शिकायत दर्ज करने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता अक्षय और उर्वशी भाटिया ने कहा कि अब साइबर अपराधी उच्चतम न्यायालय सहित फर्जी अदालती आदेशों, प्राथमिकी और गिरफ्तारी वारंटों का डर दिखाकर समझौते करने की आड़ में निर्दोष नागरिकों से पैसा वसूली करते हैं। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ताओं में से एक को डिजिटल अरेस्ट के तहत कथित तौर पर दिल्ली की एक अदालत द्वारा जारी किया गया जाली और मनगढ़ंत गिरफ्तारी वारंट मिला।
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Published By : Kanak Kumari Jha
पब्लिश्ड 7 February 2025 at 17:30 IST