'कांग्रेस के पास कोई सच्चाई नहीं, कोई दम नहीं, वो बहस के बीच में वॉकआउट कर जाएगी...', अश्विनी वैष्णव ने SIR पर संसद में बहस करने की दी चुनौती
जयपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा, "अगर कांग्रेस तैयार हैं, तो आज ही अपनी मांग रखें। हम विशेष सत्र बुलाने में संकोच नहीं करेंगे। कांग्रेस हमारी चुनौती स्वीकार करे।
- भारत
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मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) को लेकर जहां विपक्ष सरकार पर हमलावर है, वहीं, भाजपा नेता भी विपक्ष के आरोपों पर करारा पलटवार कर रहे हैं।। अब केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कांग्रेस के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह से कांग्रेस ने मुद्दे उठाए हैं, उससे लोकतंत्र और संविधान पर आंच आ रही है। लोकतंत्र का मूल सिद्धांत सही मतदाता सूची है। SIR भारत के संविधान के अनुसार एक निश्चित प्रक्रिया है, जो आज नहीं बल्कि 1947 से कई बार हो चुकी है। उन्होंने कांग्रेस को संसद में एसआईआर पर बहस करने के लिए खुली चुनौती दी।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ मिलकर "लोकतंत्र बचाओ, अराजकता मिटाओ" पदयात्रा में हिस्सा लेने के बाद जयपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा, “अगर कांग्रेस तैयार हैं, तो आज ही अपनी मांग रखें। हम विशेष सत्र बुलाने में संकोच नहीं करेंगे। अगर आप किसी खास विषय- जैसे कि 'SIR'-पर बहस करना चाहते हैं, तो आगे आएं और चर्चा करें। आपने पहले भी बहस की मांग की है। जब भी कांग्रेस ने किसी विषय पर चर्चा के लिए कहा, हमने उसका इंतजाम किया है। फिर भी, हर बार अक्सर बहस के बीच में ही कांग्रेस नेताओं ने सदन से बाहर जाना (वॉकआउट करना) चुना।”
संसद में बहस से भागती है कांग्रेस-अश्विनी वैष्णव
अश्विनी वैष्णव ने दावे के साथ कहा,"इस बार भी 'SIR' मुद्दे पर होने वाली बहस के दौरान ऐसा ही होगा। मैं आज ही बता सकता हूं कि कांग्रेस बहस के बीच में ही सदन से बाहर चली जाएगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके पास न तो कोई सच्चाई है, न कोई ठोस आधार और न ही कोई असली मुद्दा। उनका एकमात्र मकसद हमारे लोकतांत्रिक संविधान की संस्थाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर प्रहार करना-यानी हमारे लोकतंत्र को कमजोर करना है।"
EVM कांग्रेस के शासनकाल में ही आई
उन्होंने आगे कहा ,"मैं उनसे पूछना चाहता हूं, उन्हें इस तरह का बर्ताव करना किसने सिखाया है? लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी सुधारों पर कांग्रेस के रुख को लेकर निशाना साधते हुए, वैष्णव ने उन्हें याद दिलाया कि कांग्रेस के पिछले शासनकाल में ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) लाई गई थीं। कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों ने ही EVM की शुरुआत की थी, और भारत की राजनीतिक यात्रा में लोकतंत्र को मजबूत करने में इनकी अहम भूमिका रही है।"
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1947 से देश में SIR हो रहा है
कांग्रेस अब किस आधार पर इतने बड़े सुधार पर सवाल उठा रही ह। एक ऐसा सुधार जो लगभग 25 वर्षों से लागू है?" उन्होंने आगे कहा, "भारत के संविधान के अनुसार, SIR एक तय प्रक्रिया हैजिसे 1947 के बाद से कई बार अपनाया गया है, न कि सिर्फ आज। यह प्रक्रिया दस से अधिक बार अपनाई जा चुकी है। कांग्रेस पार्टी के कार्यकाल के दौरान भी ऐसा कई बार हुआ है; तो फिर, कांग्रेस के पास अब सवाल उठाने का क्या औचित्य है? अगर 1947 के बाद ऐसा पहली बार हो रहा होता, तो निश्चित रूप से कांग्रेस को इस पर सवाल उठाने का अधिकार होता। लेकिन क्या ऐसा पहली बार हो रहा है?
बैलेट पेपर की मांग पर फंसी कांग्रेस
कांग्रेस को इस पर आरोप लगाने का क्या अधिकार है? बैलेट पेपर से वोटिंग को लेकर कांग्रेस पर अपना हमला तेज करते हुए उन्होंने कहा, "आप (कांग्रेस) बैलेट पेपर से वोटिंग की वकालत करते हैं-खैर, हमने तो इसे पहले ही आजमा लिया है। हमने आपकी मांग के अनुसार बैलेट पेपर का इस्तेमाल करके चुनाव कराए थे। आप MLC चुनाव में बैलेट पेपर का इस्तेमाल करके इस प्रक्रिया को पहले ही परख चुके हैं। अगर बैलेट पेपर का इस्तेमाल करने के बाद भी कांग्रेस पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाती है, तो क्या आप बैलेट पेपर के इस्तेमाल की अपनी मांग वापस ले लेंगे?
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अश्विनी वैष्णव का कांग्रेस से सवाल
कांग्रेस से मेरा यह तीसरा सवाल है। चुनावी निष्पक्षता और वोटर लिस्ट प्रबंधन पर विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए वैष्णव ने पूछा, "क्या आप मानते हैं कि जो लोग भारत के नागरिक नहीं हैं, उन्हें भी वोट देने का अधिकार मिलना चाहिए? क्या आप चाहते हैं कि जो लोग गुजर चुके हैं, उनके नाम वोटर लिस्ट में बने रहें? क्या आप यही चाहते हैं? क्या आप चाहते हैं कि एक ही व्यक्ति का नाम चार या पांच अलग-अलग जगहों की वोटर लिस्ट में हो? क्या कांग्रेस पार्टी इसी तरह की व्यवस्था की वकालत करती है? क्या आपको संविधान पर भरोसा है? आप अक्सर संविधान की एक प्रति दिखाते हैं-लेकिन क्या आपने सच में इसे पढ़ा है? क्या आपको पता है कि संसद को संविधान के प्रावधानों के अनुसार काम करना होता है? क्या आप समझते हैं कि संवैधानिक ढांचे के तहत बनी संस्थाएं सम्मान की हकदार हैं?..."