चंडीगढ़ मेयर चुनाव को लेकर बड़ी खबर... अमान्य 8 वोटों को वैलिड मान कर गिना जाए-सुप्रीम कोर्ट का आदेश

चंडीगढ़ मेयर चुनाव में वोटों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 8 अमान्य करार दिए गए 8 वोटों को वैलिड माना।

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सुप्रीम कोर्ट | Image: ANI/File

Chandigarh Mayor Election Breaking News:  सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि सभी अमान्य आठ मतपत्रों में आप मेयर उम्मीदवार कुलदीप कुमार के पक्ष में वोट पड़े हैं। इस तरह  8 वोटों को वैलिड मान कर गिना जाए। 

चंडीगढ़ मेयर चुनाव को लेकर आप-इंडी गठबंधन शीर्ष अदालत पहुंच गया था । चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का हवाला दे याचिका डाली थी। 

समीकरण भाजपा खेमे के पक्ष में

फिलहाल समीकरणों के लिहाज से भाजपा विपक्षी खेमे पर भारी पड़ती दिख रही है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले 18 फरवरी की रात को भाजपा मेयर मनोज सोनकर ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद आम आदमी पार्टी के तीन पार्षद भी भाजपा में शामिल हो गए। इस तरह 35 सदस्यीय सदन में भाजपा के पास 18 वोट हो गए हैं। पिछली बार अकाली पार्षद हरदीप सिंह ने भी बीजेपी को वोट दिया था। ऐसे में भाजपा के पास बहुमत का आंकड़ा (19) है। ऐसे में अगर सुप्रीम कोर्ट दोबारा चुनाव कराने के आदेश जारी भी करता है तो बीजेपी की राह आसान होगी।

लोकसभा चुनाव को लेकर था आत्मविश्वास, अब क्या?

विपक्षी गठबंधन मेयर चुनाव को लोकसभा चुनाव से पहले लिट्मस टेस्ट मान रहा था। विश्वास पूरा था कि जीत उनके खाते में जाएगी। आत्मविश्वास में इजाफा होगा और फिर राह आसान हो जाएगी। लेकिन एक बार फिर मिशन 2024 में विजय पताका लहराने का ख्वाब विपक्षी पार्टियों का चूर होता दिख रहा है। वजह उसके अपने लोगों की ही लगातार छिटकना!आप के तीन पूनम देवी, नेहा मुसावत और गुरचरण काला ने पार्टी छोड़ी और तुरंत भाजपा के हो भी गए।  तीनों पार्षद दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए।

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30 जनवरी को क्या हुआ था?

चंडीगढ़ में मेयर का चुनाव 30 जनवरी को हुआ था। सांसद किरण खेर के वोट डालने के बाद वोटों की गिनती शुरू हुई। इसके बाद बीजेपी के पक्ष में 16 वोट पड़े,  कांग्रेस और AAP गठबंधन के पक्ष में 20 वोट पड़े। लेकिन प्रिसाइडिंग ऑफिसर ने कथित रूप से उनके 8 वोट रद्द कर दिए और 16 पार्षदों के समर्थन वाले बीजेपी के जीत का ऐलान कर दिया था। इसके बाद एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वह कथित रूप से अवैध करार दिए पार्षदों के वोटों पर निशान लगाते दिखाई दिए हैं। इस आधार पर कांग्रेस ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया।  सुप्रीम कोर्ट ने इस पर चंडीगढ़ प्रशासन को फटकार लगाई और मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को रखी।  पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सख्त रुख अपनाया था और उनकी टिप्पणी के आधार पर कयास लगाया जा रहा था कि वो दोबारा चुनाव कराने का आदेश जारी कर सकते हैं। 

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Published By:
 Kiran Rai
पब्लिश्ड