अपडेटेड 23 January 2026 at 22:09 IST

Budget 2026: 1 फरवरी को ही क्यों पेश किया जाता है आम बजट? मोदी सरकार ने क्यों बदली अंग्रेजों की सालों पुरानी परंपरा

Budget Facts: केन्द्रीय बजट पेश होने में बस कुछ ही दिन शेष हैं। हर साल देश में आम बजट केन्द्रीय वित्त मंत्री द्वारा 1 फरवरी को पेश किया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर 1 फरवरी को ही केन्द्रीय बजट क्यों पेश किया जाता है?

Follow : Google News Icon  
Union Budget FY26 I Key Sector-Wise Expectations
Union Budget 2026 | Image: Republic

Budget 2026 Facts: केन्द्रीय बजट पेश होने में बस कुछ ही दिन शेष हैं। हर साल देश में आम बजट केन्द्रीय वित्त मंत्री द्वारा 1 फरवरी को पेश किया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर 1 फरवरी को ही केन्द्रीय बजट क्यों पेश किया जाता है? इस आर्टिकल में हम यहां यही जानेंगे कि संसद में  देश का बही-खाता 1 फरवरी को ही क्यों पेश किया जाता है? इसके अलावा इस बार के बजट में नौकरीपेशा और मध्यमवर्गीय के लिए क्या खास हो सकता है?

पहले फरवरी के अंत में पेश होता था बजट

बता दें, साल 2017 से पहले केन्द्रीय बजट 1 फरवरी को पेश नहीं किया जाता था, बल्कि फरवरी के फरवरी महीने के आखिरी दिन पेश किया जाता था। यह एक ऐसी परंपरा थी जो ब्रिटिश हुकूमत के समय से चली आ रही थी, लेकिन साल 2017 में मोदी सरकार ने इस परंपरा को तोड़ते हुए 1 फरवरी को पेश करने का निर्णय लिया। तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश करने की तारीख को फरवरी के अंत से बदलकर 1 फरवरी कर दिया, जिससे इस बदलाव की नींव पड़ी। तभी से 1 फरवरी को केन्द्रीय बजट पेश किया जाने लगा।

क्यों टूटी सालों पुरानी परंपरा?

केन्द्रीय बजट को पेश करने की तिथि बदलाव के पीछे सरकार का तर्क बेहद व्यवारिक था।  सरकार का कहना था कि भारत में नया वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से लागू होता है, जब बजट फरवरी के अंत में पेश होगा तो संसद में उस पर चर्चा और उसे पास कराने की प्रक्रिया में समय लग जाता है। कई बार तो मई या जून भी हो जाता है, जिससे योजनाओं के लिए पैसा जारी होने में भी समय लग जाता था। लेकिन, 1 फरवरी को बजट पेश होने से सरकार को 2 महीने का अतिरिक्त समय मिल जाता है, जिससे 1 अप्रैल से सभी नए प्रावधान और फंड आवंटन सुचारू रूप से लागू हो सकें।

इस साल के बजट से बड़ी उम्मीदें?

  • क्या इस बार बढ़ेगी सेक्शन 80C लिमिट? 

बजट 2026 को लेकर टैक्सपेयर्स की सबसे बड़ी नजर सेक्शन 80C पर टिकी हुई है। लंबे समय से इस सेक्शन के तहत मिलने वाली टैक्स छूट में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि बीते वर्षों में महंगाई और निवेश से जुड़े खर्चों में लगातार इजाफा हुआ है। पीएफ, पीपीएफ, ईएलएसएस और बीमा जैसी योजनाओं में निवेश अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो चुका है, लेकिन टैक्स बेनिफिट उसी पुराने स्तर पर अटका हुआ है।

Advertisement

टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक, पुराने टैक्स सिस्टम को चुनने वालों के लिए 80C अब भी सबसे अहम राहत का जरिया है। मौजूदा आर्थिक माहौल में डेढ़ लाख रुपये की सीमा पर्याप्त नहीं मानी जा रही। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सरकार बजट 2026 में इस लिमिट को बढ़ाकर करदाताओं को राहत देने के साथ-साथ उन्हें ज्यादा बचत के लिए प्रेरित कर सकती है।

  • निवेशकों को मिल सकती है बड़ी राहत 

सिर्फ टैक्स डिडक्शन ही नहीं, बल्कि म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए भी बजट से अच्छी खबर आने की उम्मीद है। बजट 2026-27 से पहले म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के संगठन AMFI ने वित्त मंत्रालय के सामने कुछ अहम सुझाव रखे हैं। इनमें खास तौर पर मध्यमवर्ग की बचत बढ़ाने और रिटेल निवेशकों को लंबी अवधि के निवेश के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है।

Advertisement

AMFI की सिफारिशों में टैक्स स्ट्रक्चर को और सरल बनाने तथा निवेश को आकर्षक बनाने की बात कही गई है। अगर सरकार इन प्रस्तावों को स्वीकार करती है, तो छोटे निवेशकों को सीधा फायदा मिल सकता है। इससे न सिर्फ घरेलू निवेश को मजबूती मिलेगी, बल्कि आम लोगों के लिए भविष्य की आर्थिक सुरक्षा और वेल्थ क्रिएशन के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।

ये भी पढ़ें:  'कातिल, लुटेरा और भ्रष्ट यूनुस ने देश को खून से लथपथ कर दिया, हर तरफ चीखें...', पूर्व PM शेख हसीना का बांग्लादेश के हालात पर फूटा गुस्सा
 

Published By : Sujeet Kumar

पब्लिश्ड 23 January 2026 at 22:09 IST