'BRICS से क्या मिला', चिदंबरम के बयान पर सियासी बवाल, BJP ने पूछा सवाल- 1947 से 2014 तक कूटनीति का हिसाब भी दे दीजिए
नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने जा रहे आगामी BRICS शिखर सम्मेलन से ठीक पहले देश में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भारत इस महत्वपूर्ण आयोजन की मेजबानी करने जा रहा है, लेकिन इसी बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने सरकार की कूटनीतिक सफलताओं पर तीखा सवाल खड़ा कर दिया है।
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भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर सियासी तेज हो गई है। एक तरफ देश इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी की तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ इसे लेकर घरेलू राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस और बीजेपी के बीच कूटनीति और इसके फायदों को लेकर सीधी बहस छिड़ गई है।
चिदंबरम का सवाल ठोस नतीजे कहां हैं?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने ब्रिक्स सम्मेलनों की प्रासंगिकता और उनके परिणामों पर सवाल किया है। राज्यसभा सांसद ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें इस अंतरराष्ट्रीय मंच से भारत को कोई बड़ा या ठोस फायदा होता नजर नहीं आ रहा है। उनका तर्क है कि भारत ब्रिक्स के अलावा शंघाई सहयोग संगठन (SCO), G20 और क्वाड (Quad) जैसे कई महत्वपूर्ण मंचों का सक्रिय हिस्सा है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इन मंचों की बैठकों से जमीनी स्तर पर देश को क्या हासिल हो रहा है।
चिदंबरम ने यह भी जोड़ा कि पिछले दो-तीन सम्मेलनों से कोई ऐसी बड़ी उपलब्धि सामने नहीं आई है जिसे गिनाया जा सके। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि शुरुआती ब्रिक्स सम्मेलनों के कुछ सार्थक परिणाम निकले थे।
बीजेपी नेता नलिन कोहली का कांग्रेस पर पलटवार
कांग्रेस के इन बयानों पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेता नलिन कोहली ने पी. चिदंबरम की टिप्पणियों को पूरी तरह से हैरान करने वाला बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे समय में जब देश इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, तब इस तरह की नकारात्मक बयानबाजी का क्या मकसद है।
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कोहली ने कांग्रेस की कूटनीतिक समझ पर सवाल खड़े करते हुए पूछा कि क्या विदेश नीति को सिर्फ 'लेन-देन' के नजरिए से देखा जाना चाहिए? बीजेपी का सीधा आरोप है कि कांग्रेस पार्टी ब्रिक्स जैसे रणनीतिक महत्व के आयोजनों पर भी राजनीति करने की कोशिश कर रही है।
भारत कर रहा है ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की भव्य मेजबानी करने जा रहा है। भारत ने 1 जनवरी 2026 को आधिकारिक तौर पर इस समूह की अध्यक्षता संभाली थी। इस वर्ष के सम्मेलन के लिए एक बेहद खास थीम चुनी गई है, ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’। इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ सीधी वन-ऑन-वन बातचीत करेंगे, जो रणनीतिक लिहाज से बेहद अहम है।
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कई देशों के राष्ट्रपति होंगे शामिल
ब्रिक्स अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रह गया है। इसके कुनबे में अब 11 देश शामिल हो चुके हैं। भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ अब ईरान, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी इसके अहम सदस्य बन चुके हैं। यह विस्तारित समूह अब दुनिया की लगभग 49 प्रतिशत आबादी और 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी (GDP) का प्रतिनिधित्व करता है, जो इसके दबदबे को दर्शाता है।
आर्थिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से यह सम्मेलन कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है। इस महासम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा सहित दुनिया के कई प्रभावशाली नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। इतनी बड़ी कूटनीतिक हलचल के बीच, यह आयोजन भारत की बढ़ती वैश्विक धमक का सीधा प्रमाण है।