BRIC से BRICS बनने की पूरी कहानी... आखिर क्यों बना था दुनिया को बदलने वाला यह 'Super Group'?
BRICS शब्द की शुरुआत सबसे पहले साल 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने की थी। उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ दिखाने के लिए 'BRIC' नाम दिया था। ये BRIC से BRICS कैसे बना और इसमें कौन-कौन से देश जुड़े हैं? आइए जानते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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नई दिल्ली के 'भारत मंडपम' में दुनिया के सबसे शक्तिशाली आर्थिक समूहों में से एक BRICS का शिखर सम्मेलन 11, 12 और 13 को होने जा रहा है। जिसमें 11 सितंबर को मीट-ग्रीट होगा और 12, 13 सितंबर तक यह सम्मेलन जारी रहेगा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित सदस्य देशों के प्रमुखों का दिल्ली आगमन तय है, जबकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दौरे पर उत्सुकता बनी हुई है। यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो पिछले सात वर्षों में यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी।
आपको बता दें BRICS दुनिया के सबसे सबसे चर्चित अंतरराष्ट्रीय समूहों में से एक है। जिसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन जैसे 11 देशों का एक ग्रुप शामिल है। ये वैश्विक, राजनीतिक और आर्थिक शासन से जुड़े मुद्दों पर परामर्श और सहयोग के लिए इन देशों के लिए एक मंच के रूप में काम करता है। लेकिन, ब्रिक्स की शुरुआत जब हुई थी, तो ये 11 देशों का समूह नहीं था। उस वक्त सिर्फ चार देशों के समूह के तौर पर इसकी हुई थी। आइए जानते हैं कि आखिर BRIC से BRICS कैसे बना और इसमें कौन-कौन से देश शामिल हैं?
BRICS क्या है और इसका गठन कैसे हुआ?
ब्रिक्स नाम की कहानी एक अर्थशास्त्री के रिसर्च पेपर से शुरू हुई थी। ऐसा कहा जाता है कि साल 2001 में अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने एक रिपोर्ट पब्लिश की थी। जिसमें उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के रूप में माना था। इसके बाद BRIC शब्द बहुत पॉपुलर हुआ था।
जिसमें B- BRAZIL, R- RUSSIA, I- INDIA, C- CHINA था। उस समय BRIC किसी भी अंतरराष्ट्रीय संगठन या देशों का औपचारिक समूह नहीं था।
BRIC को औपचारिक मंच कब मिला?
इसके बाद ब्रिक्स को एक औपचारिक मंच देने की शुरुआत 2006 में न्यूयॉर्क में हुई, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा UNGA के दौरान ब्रिक देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक में इसे अंतिम रूप दिया गया। इसकी स्थापना प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को आर्थिक और राजनीतिक रूप से जोड़ने तथा वैश्विक मंच पर विकासशील देशों की आवाज बुलंद करने के उद्देश्य से की गई थी।
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साल 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित पहला ब्रिक शिखर सम्मेलन इस समूह के इतिहास का एक बड़ा पड़ाव साबित हुआ, क्योंकि यहां से इन देशों के बीच सहयोग शीर्ष नेताओं के स्तर तक पहुंच गया। 2010 में न्यूयॉर्क में विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान दक्षिण अफ्रीका को भी इसमें शामिल करने पर सहमति बनी।
2011 में BRIC बना BRICS
दक्षिण अफ्रीका ने 2011 में चीन के सान्या में आयोजित तीसरे शिखर सम्मेलन में पहली बार हिस्सा लिया और इसके साथ ही 'BRIC' बदलकर 'BRICS' हो गया। आगे चलकर 2024 में इसका और विस्तार हुआ जब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भी इसके पूर्णकालिक सदस्य बने, जिससे यह 10 देशों का समूह बन गया। इसके ठीक अगले वर्ष, 2025 में इंडोनेशिया के जुड़ने से सदस्यों की संख्या बढ़कर 11 हो गई। अभी वर्तमान में BRICS ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
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BRICS के पार्टनर देश कौन-कौन से हैं?
इन 11 मुख्य सदस्य देशों के अलावा 10 अन्य देश ब्रिक्स में पार्टनर देश के रूप में शामिल हैं। साल 2025 में कुल 10 देशों को ब्रिक्स के साझेदार देश का दर्जा दिया गया। इन देशों में शामिल हैं।
बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान, वियतनाम हैं। 9 देश जनवरी में शामिल हो गए थे और वियतनाम जून 2025 में शामिल हुआ।
सदस्य और पार्टनर देश में मुख्य अंतर क्या है?
BRICS के पूर्ण सदस्य देशों को समूह की गतिविधियों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में पूरा अधिकार होता है। नए देशों को शामिल करने जैसे बड़े फैसलों में भी इनकी अहम भूमिका रहती है। वहीं पार्टनर देश सिर्फ सहयोग के लिए जुड़े होते हैं। उन्हें शिखर सम्मेलनों और विदेश मंत्रियों की बैठकों में आमंत्रित किया जाता है और वे कुछ घोषणाओं या दस्तावेजों का समर्थन तो कर सकते हैं, लेकिन उनके पास निर्णय लेने का अधिकार नहीं होता है। रा
18वें BRICS समिट की थीम है 'Building for Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability'
भारत चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है, जहां नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 18वें BRICS समिट का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष सम्मेलन की थीम 'बिल्डिंग फॉर रेजिलेंस, इनोवेशन, को-ऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' रखी गई है। अपनी अध्यक्षता के दौरान भारत ने समिट से पहले देश के 25 से अधिक शहरों में लगभग 350 बैठकों का सफल आयोजन किया है।