पप्पू यादव की पेशी से पहले पटना कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, जमानत याचिका पर सुनवाई टली; अभी जेल ही रहेगा ठिकाना

बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट से सांसद पप्पू यादव की जमानत को लेकर आज सुनवाई होनी थी। लेकिन बम की धमकी मिलने के बाद सुनवाई अंतिम समय पर टल गई।

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Pappu Yadav
Pappu Yadav | Image: ANI

Pappu Yadav: पटना में सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। धमकी की गंभीरता को देखते हुए पूरे कोर्ट परिसर को तुरंत खाली करा दिया गया। बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट से सांसद पप्पू यादव की जमानत को लेकर आज सुनवाई होनी थी। लेकिन बम की धमकी मिलने के बाद सुनवाई अंतिम समय पर टल गई।

सुरक्षा कारणों के चलते कोर्ट की कार्यवाही स्थगित की गई है। ऐसे में अब पप्पू यादव को सुनवाई होने तक बेऊर जेल में ही रहना पड़ेगा। पप्पू यादव को रविवार दोपहर पटना के बेऊर जेल भेजा गया था। इससे पहले उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था। 

पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी

जानकारी के अनुसार, पटना सिविल कोर्ट को मिले धमकी भरे ई-मेल में आरडीएक्स से कोर्ट परिसर को उड़ाने की बात कही गई। इससे पहले आज सुबह ही दिल्ली के 9 बड़े स्कूलों को भी बस से उड़ाने की धमकी भरे मेल रिसिव हुए थे। एक इमेल में संसद को भी बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी।

31 साल पुराने केस में पप्पू यादव हुए गिरफ्तार

पटना पुलिस ने शुक्रवार (6 फरवरी) देर रात पप्पू यादव को हाई वोल्टेड ड्रामे के बाद उनके आवास से गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी 31 साल पुराने एक मामले में हुई है। इस दौरान काफी देर तक हाईवोल्टेज ड्रामा चला। पप्पू ने पुलिस अधिकारियों के सिविल ड्रेस में होने और खराब सेहत का हवाला देते हुए गिरफ्तारी का कड़ा विरोध जताया था।

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सांसद पप्पू यादव को गिरफ्तारी के बाद पहले उनको मेडिकल जांच के लिए IGIMS अस्पताल लाया गया था। यहां तबीयत बिगड़ने पर उन्हें PMCH शिफ्ट किया गया। इसका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें पप्पू यादव को स्ट्रेचर पर अस्पताल ले जाते हुए देखा गया था।

किराए के घर पर कब्जा करने का आरोप

मामला 1995 में पटना के एक घर पर कब्जा करने से जुड़ा है, जिसमें राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव किराए पर रहने गए थे। आरोप है कि किराए के घर में उन्होंने पहले अपना दफ्तर खोला, फिर उस पर कब्जा कर लिया। इसे लेकर मकान मालिक ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई थी।

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पटना के SP सिटी भानु प्रताप सिंह के अनुसार, '1995 का एक मामला है जो पूर्ववर्ती IPC थी, BNS के स्थान पर उसके तहत 419, 420, 468, 448, 506 और 120बी, इसके तहत गिरफ्तारी सुनिश्चित की जा रही है। यह गर्दनीबाग थाने का मामला है। इसमें न्यायालय द्वारा ट्रायल केस चल रहा था जिसमें सांसद को उपस्थित होना था लेकिन वे तय तारीख पर उपस्थित नहीं हुए थे। इस कारण उनकी गिरफ्तारी की जा रही है।'

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Published By:
 Priyanka Yadav
पब्लिश्ड