Samrat Choudhary: राबड़ी सरकार में 19 की उम्र में बने मंत्री, विरासत में मिली सियासत... कैसा रहा बिहार के नए CM सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर?

Samrat Choudhary: बिहार को बीजेपी का पहला सीएम मिलने जा रहा है। सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। उन्होंने RJD से अपनी राजनीतिक शुरुआत की, फिर JDU होते हुए 2018 में भाजपा जॉइन की और पार्टी में तेजी से ऊंचाइयों को छुआ।

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Bihar New CM Samrat Choudhary
सीएम की कुर्सी तक सम्राट चौधरी का पूरा सफर | Image: Republic

Bihar New CM Samrat Choudhary: बिहार में अब नीतीश कुमार के बाद 'सम्राट' युग का आगाज होने जा रहा है। मंगलवार (14 अप्रैल) को राज्यसभा की राह पकड़ चुके नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद बीजेपी विधायक दल की बैठक हुई। बैठक में सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है।

बिहार में पहली बार BJP का सीएम बनने जा रहा है। सम्राट चौधरी जल्द ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। कोइरी (कुशवाहा) समुदाय से आने वाले सम्राट ने कुछ सालों में पार्टी भाजपा में तेजी से उभार हासिल किया है। राजनीतिक विरासत, संगठनात्मक क्षमता और कुशवाहा वोट बैंक पर पकड़ की वजह से उन्हें बिहार की सत्ता का नया ‘सम्राट’ कहा जा रहा हैं।

जन्म और प्रारंभिक जीवन

सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले के तारापुर प्रखंड के लखनपुर गांव में हुआ। उन्हें सियासत विरासत में मिली है। सम्राट का बचपन ही राजनीति से घिरा रहा। पिता शकुनी चौधरी समता पार्टी के संस्थापकों में से एक थे। वे सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं। वहीं, मां पार्वती देवी भी तारापुर विधानसभा से विधायक रहीं। परिवार की राजनीतिक जड़ें इतनी गहरी हैं कि लखनपुर आज भी चौधरी परिवार का गढ़ माना जाता है।

परिवार पूरी तरह राजनीतिक है। पिता-मां दोनों ने तारापुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। सम्राट ने 2007 में ममता कुमारी से शादी की थी। ममता एक वकील हैं। उनके दो बच्चे (एक बेटा प्रणय प्रियम चौधरी और एक बेटी चारू प्रिया) हैं।

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शिक्षा

सम्राट चौधरी ने उच्च शिक्षा मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से प्राप्त की। चुनावी हलफनामे के मुताबिक उन्होंने डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (D.Litt.) की उपाधि हासिल की है। उनकी प्रोफेशनल कैटेगरी “सामाजिक सेवा” है।

राजनीतिक सफर

सम्राट ने RJD से BJP तक का लंबा सफर तय किया है। साल 1990 में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और राजद से अपनी शुरूआत की। वे साल 1999 में राबड़ी देवी सरकार में मंत्री बने थे, लेकिन उनकी उम्र महज 19 साल होने का दावा किया गया। ऐसे में कम उम्र के चलते विवाद हुआ और राज्यपाल ने उन्हें हटा दिया। इसके बाद साल 2000 और 2010 में वे परबत्ता विधानसभा से दो बार विधायक चुने गए।

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2014 में सम्राट चौधरी ने राजद छोड़ जेडीयू का दामन थाम लिया। जब जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री बने तो उन्हें शहरी विकास एवं आवास मंत्री बनाया गया। 2018 में सम्राट BJP में शामिल हुए और तेजी से पार्टी में ऊंचाई पर पहुंचे। वे 2023 में बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष बने।

जनवरी 2024 में नीतीश कुमार की NDA सरकार में उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया और कई विभागों की जिम्मेदारी भी मिली, जिसमें वित्त, शहरी विकास, स्वास्थ्य, पंचायती राज शामिल रहे। 2025 विधानसभा चुनाव में सम्राट ने तारापुर विधानसभा से भारी मतों से जीत हासिल की और फिर से उपमुख्यमंत्री बने।

सम्राट ने कभी कुशवाहा हत्या मामले में नाम आने जैसी विवादों का सामना किया, लेकिन कभी दोषी नहीं ठहराए गए। चुनावी हलफनामे में उनके खिलाफ 2 मामले दर्ज हैं।

नेट वर्थ और संपत्ति

सम्राट चौधरी बिहार के सबसे अमीर नेताओं में शुमार हैं। उनके परिवार की कुल नेटवर्थ लगभग 11.34 करोड़ रुपये बताई जाती हैइसमें चल और अचल दोनों संपत्तियां शामिल हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नामांकन में दौरान यह जानकारी दी थी।

सम्राट चौधरी को “फायरब्रांड” नेता कहा जाता है। वे कुशवाहा समाज के सबसे बड़े चेहरे हैं और BJP में OBC की मजबूत पहचान बन चुके हैं। सम्राट चौधरी बिहार की राजनीति की नई कहानी लिखने जा रहे हैं।

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Published By :
Ruchi Mehra
पब्लिश्ड