भरत तिवारी एनकाउंटर पर बवाल, महापंचायत में उमड़ा हुजूम, सड़क की जाम; प्रशांत किशोर की दो टूक- 15 दिन में न्याय न मिला तो सम्राट चौधरी के घर...
Bhojpur Mahapanchayat: भरत तिवारी कथित फेक एनकाउंटर मामले में हुई पहापंचायत में प्रशांत किशोर ने 15 दिनों में न्याय न मिलने पर सीएम सम्राट चौधरी का आवास घेराव की चेतावनी दी। गुस्साए लोगों ने NH पर कई किलोमीटर जाम लगा दिया, इस बार पुलिस लोगों से दूर रही। पहापंचायत में एक करोड़ मुआवजा व सरकारी नौकरी की मांग की गई।
- भारत
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Bharat Tiwari Case Bhojpur: भोजपुर जिले में कथित फेक एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी के मामले को लेकर बड़ा जन आंदोलन छिड़ गया है। बुधवार को हुई महापंचायत में आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। ग्रामीणों, महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में पुलिस की कार्रवाई को फर्जी बताते हुए कड़ी निंदा की और उच्चाधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
महापंचायत में शामिल महिलाओं ने भावुक होकर कहा कि "भरत तिवारी ने गांव बसाया, विकास कराया और इलाके के लोगों की मदद की। जिसने हमारे लिए सब कुछ किया, पुलिस ने उसे मार दिया", महिलाओं का गुस्सा साफ दिख रहा था। लोगों ने आरोप लगाया कि यह एनकाउंटर फर्जी था और पुलिस केवल खानापूर्ति कर रही है।
महापंचायत में शामिल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता प्रशांत किशोर भी शामिल होने पहुंचे। पंचायत में शामिल लोगों ने कहा कि डीएसपी स्तर के अधिकारी ही नहीं, बल्कि ऊपरी अधिकारी भी इस मामले में शामिल हैं। पूरी घटना में पारदर्शी जांच की मांग की गई।
प्रशांत किशोर का बयान
महापंचायत में प्रशांत किशोर ने सख्त लहजे में कहा, “15 दिन में अगर न्याय नहीं मिला तो बिहार के सीएम सम्राट चौधरी के आवास का घेराव किया जाएगा।” प्रशांत किशोर ने प्रशासन से आगे सवाल उठाया कि अभी सिर्फ घोषणा की गई है। यह भी नहीं बताया गया कि कौन जांच कर रहा है। उन्होंने भरत तिवारी के परिवार का आजीवन खर्च उठाने की घोषणा भी की।
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पुलिस की दूरी और हाईवे जाम
महापंचायत के दौरान पुलिस की भूमिका भी चर्चा में रही। पुलिस बल जानबूझकर घटनास्थल से दूर रहा। कुछ जवान खेतों में, कुछ बगीचों में और कुछ हाईवे से करीब 200 मीटर दूर खड़े रहे। महापंचायत के समय नेशनल हाईवे (NH) पर दो-तीन बार जाम की स्थिति बन गई। कई किलोमीटर लंबा जाम लगा, लेकिन पुलिस ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया।
एक गुट ने हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर 2 दिन में मांगें नहीं मानी गईं तो फिर से हाईवे जाम किया जाएगा। साथ ही सीएम हाउस तक घेराव करने की रणनीति भी बनाई गई। महापंचायत में एक करोड़ रुपये मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग जोर-शोर से की गई।
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सरकार की एनकाउंटर नीति पर सवाल
लोगों ने मौजूदा सरकार की एनकाउंटर नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निर्दोषों को निशाना बनाया जा रहा है और यह रणनीति लोकतंत्र के खिलाफ है। महापंचायत में शामिल लोगों ने साफ कहा कि भरत तिवारी का मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे इलाके के विकास और न्याय का सवाल है।
महापंचायत में तय हुआ कि अगर 15 दिनों में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। हाईवे जाम, घेराव और बड़े स्तर पर प्रदर्शन की तैयारी चल रही है। यह महापंचायत बिहार में कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े करती नजर आ रही है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, 16 जून को मिली सूचना के आधार पर शाहपुर थाना टीम 17 जून सुबह भरत के घर पहुंची थी। अवैध हथियार बरामद करने और गिरफ्तारी के लिए गई टीम पर भरत ने कथित तौर पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में वह घायल हुआ और इलाज के दौरान पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में उसकी मौत हो गई।
फर्जी एनकाउंटर का आरोप
परिवार का आरोप है कि यह फर्जी एनकाउंटर था। भरत ने कथित तौर पर सरेंडर कर दिया था, लेकिन पुलिस ने गोली मार दी। एक वायरल वीडियो में भरत को पुलिस को हथियार सौंपते दिखाया गया, जिससे सवाल उठ रहे हैं। परिवार ने फर्जी एनकाउंटर और हत्या का आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की।