West Bengal: सुवेंदु सरकार का बड़ा फैसला, अवैध रूप से बंगाल में रह रहे बांग्लादेशियों की पहचान कर BSF को सौंपा जाएगा
पश्चिम बंगाल में नई सरकार अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की सख्ती से पहचान कर उन्हें BSF को सौंपेगी। राज्य सरकार ने डिटेक्ट-डिपोर्ट नीति अपनाई है। साथ ही कैबिनेट विस्तार, नमामि गंगे प्रोजेक्ट, कृषि बजट और चिकन नेक क्षेत्र NHAI को सौंपने जैसे विकास कार्य भी तेज होंगे।
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पश्चिम बंगाल में BJP की नई सरकार के गठन के बाद से लगातार अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें सीधे सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, “डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट” नीति के तहत सभी अवैध घुसपैठियों को चिन्हित किया जाएगा और उन्हें BSF के हवाले कर डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि राज्य पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को पहचानने, हिरासत में लेने और बीएसएफ को सौंपने की कार्रवाई तेज की जाए। हर सप्ताह इसकी रिपोर्ट सीएमओ को भेजी जाएगी। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और राज्य की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अवैध घुसपैठ पर फोकस
पश्चिम बंगाल भारत-बांग्लादेश सीमा से लगा राज्य है, जहां लंबे समय से अवैध घुसपैठ, तस्करी और संबंधित अपराधों की शिकायतें रही हैं। नई सरकार का मानना है कि अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों ने स्थानीय संसाधनों पर दबाव बढ़ाया है, साथ ही कानून-व्यवस्था को चुनौती दी है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर कांटेदार तार की बाड़ लगाने के लिए BSF को जमीन सौंपना भी शुरू कर दिया है। हाल ही में बाड़बंदी के लिए 27 किलोमीटर भूमि BSF को सौंपी जा चुकी है।
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बिना बाड़ 600 किलोमीटर सीमा
पश्चिम बंगाल भारत-बांग्लादेश की 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा का लगभग 2,200 किलोमीटर हिस्सा साझा करता है। सीमा पर लगभग 1,600 किलोमीटर पर बाड़ लगाई जा चुकी है, लेकिन 600 किलोमीटर का हिस्सा अभी भी बिना बाड़ के है। सरकार का लक्ष्य पूरे 2,200 किलोमीटर लंबी सीमा को जल्द से जल्द सुरक्षित बनाना है।
विकास कार्यों पर जोर
इस बीच, पश्चिम बंगाल में जल्द ही कैबिनेट विस्तार होने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, नए मंत्रियों को शीघ्र जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके। नमामि गंगे परियोजना के तहत राज्य को अतिरिक्त फंड और नए प्रोजेक्ट्स मिलने की उम्मीद है, जिससे गंगा नदी की सफाई और किनारे के इलाकों का विकास होगा। कृषि क्षेत्र को भी विशेष बजट आवंटन किया जाएगा, ताकि किसानों की आय बढ़े और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा मिले।