'क्या Secularism का चोला सिर्फ सनातनियों ने पहन रखा है?' पूर्व CJI रोहिंटन पर भड़के महंत राजू दास

राम मंदिर को लेकर SC के पूर्व CJI रोहिंटन के बयान पर महंत राजू दास ने भड़कते हुए पूछा कि क्या केवल सनातनियों ने सेक्युलरिज्म का चोला पहना है?

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देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने राम मंदिर को लेकर ऐसा बयान दिया जिसे लेकर महंत राजू दास भड़क उठे। उन्होंने पूर्व सीजेआई के बयान पर पलटवार किया है। पूर्व CJI ने बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराने के बाद कोर्ट में जो ट्रायल हुए, उसे लेकर सवाल उठाया। इसपर महंत राजूदास का एक बयान सामने आया है।

महंत राजूदास ने पूर्व सीजेआई के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा, "सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रोहिंटन नरीम ने राम जन्मभूमि पर कमेंट करते हुए टिप्पणी किया कि जिस तरह से राम मंदिर पर आदेश आया ये कहीं से ठीक नहीं है। ये कांग्रेस सरकार में पूर्व चीफ जस्टिस रहे हैं। मैं इनसे पूछना चाहता हूं कि क्या सेक्युलरिज्म का चोला सिर्फ सनातनियों ने पहन रखा है? धर्म के आधार पर देश का बंटवारा हुआ आप मौन थे, चुप थे, शांत थे। आज जिस प्रकार के देश के 5 लाख मंदिरों को कांग्रेस सरकार ने जब्त करके रखा है। आए दिन हिंदू और हिंदुत्व पर कुठाराघात, आए दिन सनातन पर टीका-टिप्पणी की जाती है, और आपका एक सवाल नहीं होता है?"

'ये जन्म भूमि का विषय है, मंदिर-मस्जिद का नहीं': महंत राजूदास

उन्होंने आगे कहा कि राम मंदिर मंदिर-मस्जिद की लड़ाई नहीं थी, यह जन्मभूमि का विषय था। जन्म भूमि एक जगह हो सकता है, दस जगह नहीं। मंदिर भी अयोध्या में हजारों हैं, मस्जिद भी सैकड़ों हैं। यह जन्मभूमि का सवाल था। जन्मभूमि बनने से देश की अस्मिता, एकता-अखंडता, देश की सहिष्णुता, देश में रहने वाले हिंदुओं के आराध्य भगवान राम का मंदिर बनना अति सुखद है, जिसपर आप टिप्पणी कर रहे हो यह अति दुर्भाग्यपूर्ण है। पता नहीं आपको  माता-पिता ने कैसी शिक्षा-दीक्षा दी कि हिंदू और हिंदुत्व, सनातन और संस्कृति में फर्क ही नहीं कर पा रहे हो।

22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की हुई थी प्राण प्रतिष्ठा

बता दें, करीब 500 वर्षों के संघर्ष के बाद 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर में की गई। हालांकि, मंदिर में अभी भी निर्माण कार्य जारी है। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा ना केवल सनातनितयों के लिए बल्कि संपूर्ण भारत वर्ष के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। जिस राम लला को उनकी ही जन्म भूमि पर एक टैंट में रखा जा रहा था, उन्हें अंततः राम मंदिर के गर्भ गृह में लाया गया। इस दौरान सभी राम भक्तों और सनातनियों के आंखों में खुशी के आंसू थे। पूरी नियम निष्ठा के साथ मंदिर में श्री राम के बाल रुप की प्राण प्रतिष्ठा की गई। 

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Published By:
 Kanak Kumari Jha
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