'हमें मर जाना स्वीकार है, लेकिन वंदे मातरम् नहीं गा सकते', अरशद मदनी का एक और विवादित बयान; कहा- मुसलमान केवल एक अल्लाह...
सदन में वंदे मातरम् पर जारी डिबेट के बीच जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने एक और विवादित बयान देकर हड़कंप मचा दिया है।
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सदन में वंदे मातरम् पर जारी डिबेट के बीच जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने एक और विवादित बयान देकर हड़कंप मचा दिया है। अरशद मदनी ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि हमें मर जाना स्वीकार है, लेकिन हम वंदे मातरम् नहीं गा सकते।
इससे पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 8 दिसंबर को लोकसभा को संबोधित किया। वंदे मातरम् की 150 वर्षगांठ को लेकर संसद में चल रही बहस में उन्होंने भी अपने विचार रखे। ओवैसी ने कहा कि देशभक्ति को किसी एक धर्म या पहचान से जोड़ना, ये संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है। इससे सामाजिक विभाजन बढ़ेगा।
क्या बोले मदनी?
मदनी ने एक्स पर लिखा, "हमें किसी के “वंदे मातरम्” पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता। “वंदे मातरम्” का अनुवाद शिर्क से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है, इसके चार श्लोकों में देश को देवता मानकर “दुर्गा माता” से तुलना की गई है और पूजा के शब्दों का प्रयोग हुआ है। साथ ही “मां, मैं तेरी पूजा करता हूं” यही वंदे मातरम् का अर्थ है। यह किसी भी मुसलमान की धार्मिक आस्था के खिलाफ है। इसलिए किसी को उसकी आस्था के खिलाफ कोई नारा या गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। क्योंकि भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) देता है।"
उन्होंने आगे कहा, "वतन से प्रेम करना अलग बात है, उसकी पूजा करना अलग बात है। मुसलमानों की देशभक्ति के लिए किसी के प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं है। स्वतंत्रता संग्राम में उनकी कुर्बानियां इतिहास के सुनहरे पन्नो में दर्ज हैं। हम एक खुदा (अल्लाह) को मानने वाले हैं, अल्लाह के सिवा न किसी को पूजनीय मानते हैं और न किसी के आगे सजदा करते हैं। हमें मर जाना स्वीकार है, लेकिन शिर्क (खुदा के साथ किसी को शामिल करना) कभी स्वीकार नहीं!"
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ओवैसी ने क्या कहा था?
ओवैसी ने लोकसभा में कहा कि मुसलमानों से बार-बार वफादारी का सर्टिफिकेट मांगना बंद किया जाए। AIMIM प्रमुख ने कहा कि हमारे संविधान की शुरुआत We The People से होती है, न कि किसी देवी-देवता के नाम से। इसका आगाज भारत माता से नहीं होता। ‘भारत माता’ के नारे पर आपत्ति जताते हुए ओवैसी ने कहा कि अगर हम भारत माता को एक देवी के रूप में संबोधित कर रहे हैं, तो हम इसमें धर्म को ला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विचार, अभिव्यक्ति और इबादत की आजादी ही लोकतंत्र का मूल है। तो किसी नागरिक को किसी खुदा, देवी-देवता की इबादत या सज्दा करने के लिए मजबूर कैसे किया जा सकता है? यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है और किसी को अपनी मान्यता थोपने का अधिकार नहीं है। ये कह रहे हैं कि अगर भारत में रहना होगा तो वंदे मातरम् कहना होगा, ये संविधान के खिलाफ है।