अपडेटेड 4 January 2026 at 19:56 IST

अमेरिका का Venezuela पर कब्जे से रूस-चीन की बढ़ी टेंशन, हर तरफ हाहाकार, लेकिन भारत को हो सकता है 9000 करोड़ का फायदा! जानिए कैसे

अमेरिका ने वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई को अंजाम देकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि काराकास में स्थिरता बहाल होने तक अमेरिका ही देश का शासन संभालेगा।

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Trump/Venezuelan President Nicolas Maduro
Trump/Venezuelan President Nicolas Maduro | Image: Republic

अमेरिका ने वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई को अंजाम देकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि काराकास में स्थिरता बहाल होने तक अमेरिका ही देश का शासन संभालेगा। इस कदम से वैश्विक तनाव बढ़ गया है, लेकिन भारत को इससे तेल आयात, उत्पादन और बकाये की वसूली में अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर अमेरिकी नियंत्रण भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा।

भारत लंबे समय से वेनेजुएला का प्रमुख कच्चे तेल खरीदार रहा है। 2019 तक भारत प्रतिदिन औसतन 4 लाख बैरल से ज्यादा तेल आयात करता था, जो कुल आयात का करीब 10% था। अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद 2020 से यह रुका हुआ है, जिससे रिफाइनरियों को रूस और मध्य पूर्व पर निर्भरता बढ़ी। अब अमेरिकी हस्तक्षेप से प्रतिबंध हटने की संभावना है, जिससे सस्ता वेनेजुएला तेल फिर लौट सकता है।

ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र में 40% हिस्सेदारी के साथ सक्रिय है। प्रतिबंधों से तकनीकी उपकरणों की कमी हुई, जिससे उत्पादन घटकर महज 5-10 हजार बैरल प्रतिदिन रह गया। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी कंट्रोल से ओवीएल गुजरात के अपने रिग्स भेजकर उत्पादन को 80 हजार से 1 लाख बैरल प्रतिदिन तक ले जा सकती है।

बकाया 1 अरब डॉलर मिलने की उम्मीद, रिफाइनरियों को राहत

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वेनेजुएला सरकार पर ओवीएल का करीब 1 अरब डॉलर (करीब 9000 करोड़) का बकाया है, जिसमें 2014 तक का 53.6 करोड़ डॉलर लाभांश शामिल है। ऑडिट न होने से बाकी दावे लंबित हैं। अमेरिकी हस्तक्षेप से वैश्विक बाजार में निर्यात बहाल होगा, जिससे वसूली आसान हो जाएगी। ओवीएल ने पहले ही अमेरिकी वित्त मंत्रालय के OFAC से विशेष लाइसेंस मांगा था।

केप्लर के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निखिल दुबे ने कहा, "प्रतिबंध हटने से तेल व्यापार तेजी से पटरी पर लौटेगा। वेनेजुएला का भारी और सस्ता कच्चा तेल रिलायंस, नायारा, IOCL और HPCL-मित्तल जैसी रिफाइनरियों के लिए आदर्श है।" विश्लेषकों का अनुमान है कि इससे वैश्विक तेल कीमतें स्थिर होंगी और भारत को सालाना 2-3 अरब डॉलर की बचत हो सकती है।

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Published By : Ankur Shrivastava

पब्लिश्ड 4 January 2026 at 19:56 IST