अपडेटेड 21 March 2025 at 17:25 IST

'हम कोई कूड़ेदान नहीं...', कैश कांड में फंसे जस्टिस वर्मा के ट्रांसफर पर इलाहाबाद HC बार एसोसिएशन का पारा हाई

जस्टिस यशवंत वर्मा को साल 2021 में इलाहाबाद हाई कोर्ट से ही दिल्ली हाईकोर्ट भेजा गया था। अब उन्हें वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजने का फैसला हुआ।

Follow : Google News Icon  
allahabad hc on justice yaswant varma transfer
allahabad hc on justice yaswant varma transfer | Image: X, Shutterstock

Allahabad HC Comment: दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के यहां करोड़ों का कैश बरामद होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जहां कॉलेजियम ने उनका इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। वहीं, जस्टिस यशवंत वर्मा के ट्रांसफर का इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विरोध किया है। बार एसोसिएशन ने कहा है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट को कूड़ादान नहीं है, जहां पर किसी भी विवादित जज का ट्रांसफर कर दिया जाए।

जस्टिस यशवंत वर्मा को साल 2021 में इलाहाबाद हाई कोर्ट से ही दिल्ली हाईकोर्ट भेजा गया था। अब उनके घर पर करोड़ों की नकदी की बरामदगी का मामला सामने आने और तूल पकड़ने के बाद कॉलेजियम ने एक बैठक बुलाई और इसमें जस्टिस यशवंत वर्मा को वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजने का फैसला हुआ।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कॉलेजियम के फैसले का किया विरोध

इलाहाबाद हाई कोर्ट के बार एसोसिएशन ने कॉलेजियम के इस फैसले का विरोध किया और इस पर तीखी टिप्पणी भी की। बार एसोसिएशन ने कहा है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट कोई कूड़ादान नहीं है। भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह मामला तब और भी गंभीर हो जाता है जब हम मौजूदा हालात पर गौर करते हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट पहले से ही जजों की कमी से जूझ रहा है। सालों से नई नियुक्तियां नहीं की गई हैं। यह भी गंभीर चिंता की बात है कि जजों की नियुक्ति को लेकर बार से सलाह नहीं ली जाती।

पत्र में बार एसिसोएशन ने चेतावनी दी कि यह फैसला न्यायपालिका में जनता के विश्वास को हिला सकता है। इसमें कहा गया कि जस्टिस के घर से रुपये मिलना पूरी तरह से गलत है। ऐसे में आरोपी लोगों को ही हाई कोर्ट में न्याय देने के लिए बैठा दिया जाएगा तो जनता में इससे न्याय को लेकर विश्वास कम होगा। यह मामला न्यायिक प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर संकट खड़ा करने वाला है। इस दौरान एसोसिएशन की ओर से अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला भी दिया गया।

Advertisement

क्या है पूरा मामला जिस पर मचा बवाल

ये घटना होली (14 मार्च) के दिन की है। दिल्ली के तुगलक रोड पर जस्टिस यशवंत वर्मा के घर देर रात 11.30 बजे आग लग गई। तब जज शहर में नहीं थे। होली के त्योहार में वह कहीं बाहर गए हुए थे। इसके बाद आग बूझाने के लिए फायर ब्रिगेड और पुलिस को बुलाया गया। आग बुझाने के लिए बचावकर्मी एक कमरे में घुसे तो हक्के बक्के रह गए। कमरे में भारी मात्रा में कैश बरामद हुआ।

इलाहाबाद हाई कोर्ट वापस भेजने का प्रस्ताव हुआ पास

दिल्ली पुलिस की ओर से मामले की जानकारी गृह मंत्रालय को दी गई और इस संबंध में एक रिपोर्ट भी भेजी गई। गृह मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को CJI संजीव खन्ना को भेज दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए CJI ने 20 मार्च को कॉलेजियम की बैठक बुलाई। इसमें जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट वापस भेजने का प्रस्ताव पास हुआ। जान लें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट से ही जस्टिस यशवंत वर्मा 2021 में दिल्ली हाईकोर्ट भेजा गया था।

Advertisement

कॉलेजियम के कुछ सदस्यों का ऐसा मानना ​​है कि ऐसे गंभीर मामलों में केवल ट्रांसफर काफी नहीं है। न्यायपालिका की छवि इससे धूमिल होती है और संस्था के प्रति लोगों का विश्वास भी कम होगा। इस दौरान सुझाव दिया गया कि जस्टिस यशवंत वर्मा से इस्तीफा मांगा जाना चाहिए। अगर वो ऐसा करने से इनकार करते हैं, तो उनकी CJI द्वारा इन-हाउस जांच शुरू की जानी चाहिए।

यह भी पढ़ें: Cash Discovery Row: 'जज के घर कैश' पर बवाल, हरीश साल्वे ने उठाए कॉलेजियम के फैसले पर सवाल; धनखड़ बोले- कोई राजनेता होता तो…

Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 21 March 2025 at 17:02 IST