दुष्कर्म से जुड़े इलाहाबाद हाईकोर्ट के विवादित फैसले पर बवाल, सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर; ऐसे फैसलों पर दिशानिर्देश की मांग

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के प्राइवेट पार्ट्स को छूना और पायजामी की डोरी तोड़ने को बलात्कार या बलात्कार की कोशिश के मामले में नहीं गिना जा सकता है।

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Supreme Court strict on disposal of solid waste in Delhi
दुष्कर्म से जुड़े इलाहाबाद हाईकोर्ट के विवादित फैसले पर बवाल, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर | Image: PTI

Allahabad High Court: नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के 17 मार्च को दिए विवादित फैसले पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि पीड़िता के प्राइवेट पार्ट्स को छूना और पायजामी की डोरी तोड़ने को बलात्कार या बलात्कार की कोशिश के मामले में नहीं गिना जा सकता है।

वकील अंजले पटेल की ओर से दायर इस याचिका में जजमेंट के उस विवादित हिस्से को हटाने की मांग की गई है, जिसमें कोर्ट ने कहा कि पीड़ित के ब्रेस्ट को पकड़ना और पजामे के नाड़े को तोड़ने के बावजूद आरोपी के खिलाफ रेप की कोशिश का मामला नहीं बनता।

वावादित टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मांग

वकील अंजले पटेल की तरफ से दायर याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट केन्द्र सरकार/ हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दे कि वो फैसले के इस विवादित हिस्से को हटाए। इसके साथ ही याचिका में मांग की गई है कि जजों की ओर से की जाने वाली ऐसी विवादित टिप्पणियों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट अपनी ओर से एक दिशानिर्देश जारी करें।

क्या है पूरा मामला

यूपी में कासगंज के पटियाली थाना क्षेत्र में 10 नवंबर 2021 को हुई एक घटना से जुड़ा ये मामला है। जिसमें एक महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि वह अपनी 14 साल की बेटी के साथ कहीं जा रही थी, तभी रास्ते में पवन, आकाश और अशोक नाम के 3 लोगों ने बेटी को घर छोड़ने के बहाने अपनी बाइक पर बैठा लिया। जिसके बाद बच्ची के साथ जो हुआ उसकी शिकायत की गई और FIR में कहा गया कि, आरोपियों ने रास्ते में एक पुलिया के पास गाड़ी रोककर उसकी बेटी के स्तन पकड़े और पायजामे का नाड़ा तोड़ दिया। इसके बाद गलत इरादे से उसे पुलिया के नीचे खींच कर ले जाने लगे।

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स्तन छुना और नाड़े को तोड़ना रेप की कोशिश नहीं- इलाहाबाद हाईकोर्ट

इस बीच चीख पुकार सुनकर वहां लोगों की भीड़ छूट गई, जिसकी वजह से आरोपी उसकी बेटी को छोड़कर भाग निकले। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ IPC में रेप की धारा 376 और पोक्सो एक्ट की धारा 18 यानी अपराध करने की कोशिश का केस दर्ज किया गया। निचली अदालत ने इन्हीं धाराओं में आरोपियों के खिलाफ समन जारी किया। लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि पीड़िता के प्राइवेट पार्ट्स को छूना और पायजामी की डोरी तोड़ने को बलात्कार या बलात्कार की कोशिश के मामले में नहीं गिना जा सकता है।

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Published By :
Nidhi Mudgill
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