2 नवंबर को आंध्र तट पर दस्तक दे सकता है नया चक्रवात, IMD ने जारी की भारी बारिश की चेतावनी

बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र लगातार गहरा होता जा रहा है। इसके जल्द ही एक गहरे डिप्रेशन और फिर भयंकर चक्रवाती तूफान में बदलने की पूरी आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, इस तूफान के आगामी 2 नवंबर की शाम तक आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों के पास पहुंचने की प्रबल संभावना है।

  • Facebook Share Icon
  • Twitter Share Icon
  • WhatsApp Share Icon
 
Follow : Google News Icon
2 नवंबर को आंध्र तट पर दस्तक दे सकता है नया चक्रवात, IMD ने जारी की भारी बारिश की चेतावनी
2 नवंबर को आंध्र तट पर दस्तक दे सकता है नया चक्रवात, IMD ने जारी की भारी बारिश की चेतावनी | Image: Meta AI

IMD के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के ऊपर बना मौसम का नया सिस्टम तेजी से मजबूत हो रहा है। दक्षिण अंडमान सागर और उसके आसपास के क्षेत्रों में बना लो-प्रेशर एरिया अब पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा की ओर बढ़ चुका है। 31 अक्टूबर 2026 की सुबह तक यह दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी पर एक 'वेल मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया' के रूप में केंद्रित हो गया है।

चक्रवाती तूफान में बदलने की संभावना

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस प्रणाली से जुड़ा चक्रवातीय परिसंचरण समुद्र तल से लगभग 7.6 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैला हुआ है। अनुमान है कि आगामी 6 घंटों में यह सिस्टम डिप्रेशन में तब्दील हो जाएगा और अगले 24 घंटों के भीतर और अधिक तीव्र होकर एक चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, यह चक्रवाती तूफान पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए 2 नवंबर 2026 की शाम तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में आंध्र प्रदेश के तट के करीब पहुँच सकता है। चूंकि यह प्रणाली अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए इसके सटीक रास्ते और तीव्रता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

अंडमान-निकोबार और आंध्र प्रदेश में मौसम का हाल

इस मौसमी बदलाव के कारण अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के तटीय इलाकों में तेज गरज के साथ भारी बारिश की संभावना है। समुद्र में स्थिति उग्र रहने के आसार हैं, जहां हवाओं की गति 37 से 46 किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर झोंकों में 55 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में भी आने वाले दिनों में मूसलाधार बारिश का खतरा मंडरा रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय बंदरगाहों पर सतर्कता संकेत जारी किए जा सकते हैं।

सुरक्षा निर्देश और आपदा प्रबंधन की तैयारी

समुद्र में जाने वाली नावों, जहाजों और मछुआरों को फिलहाल गहरे समुद्र से दूर रहने और पूर्ण सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तथा किसानों को संभावित मौसम परिवर्तन के प्रति सतर्क रहने को कहा गया है। अक्टूबर और नवंबर के महीनों में बंगाल की खाड़ी में इस प्रकार की प्रणालियों का बनना आम बात है, जो अपने साथ तेज हवाएं और भारी बारिश लाती हैं। संबंधित राज्य सरकारों और आपदा प्रबंधन टीमों ने अग्रिम तैयारियां शुरू कर दी हैं।

Advertisement

ये भी पढ़ें - कोई जाग रहा होता तो बच जाती जान...देर रात बाथरूम में गिरने के बाद खून से लथपथ तड़प रहे, सोता रहा परिवार; ऐसे हुआ डायरेक्टर संजय गुप्‍ता का निधन

Published By:
 Aarya Pandey
पब्लिश्ड