अपडेटेड 4 July 2024 at 21:22 IST

केजरीवाल के समर्थन में उतरे 150 वकील, जमानत पर स्टे को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का विरोध; पूरा मामला

New Delhi: दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के समर्थन में करीब 150 वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है।

Follow : Google News Icon  
Why Delhi HC Stayed Arvind Kejriwal's Bail Order in Excise Policy Case | Explained
Arvind Kejriwal | Image: File

New Delhi: दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के समर्थन में करीब 150 वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है। पत्र में वकीलों ने दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस पर भी आरोप लगा दिए हैं।

वकीलों ने पत्र में लिखा है कि केजरीवाल की जमानत अर्जी पर जज फैसला लेने में देरी कर रहे हैं और लंबी लंबी तारीखें दे रहे हैं। चिट्ठी में यह भी कहा गया है कि हाईकोर्ट के जज जस्टिस सुधीर जैन को केजरीवाल की जमानत के खिलाफ ED की अर्जी पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए थी क्योंकि जस्टिस सुधीर जैन के भाई अनुराग जैन ED के वकील हैं।

वकीलों ने क्या लिखा?

वकीलों ने लिखा- 'हम दिल्ली हाई कोर्ट और दिल्ली के विभिन्न जिला न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले कानूनी समुदाय की ओर से लिख रहे हैं। कई वकील अपनी चिंताओं और शिकायतों के साथ हमारे पास पहुंचे। जैसा कि आप जानते हैं, माननीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश न्याय बिंदु ने 20.06.2024 को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत दे दी थी। अपने आदेश में उन्होंने कहा कि निचली अदालतों को त्वरित और साहसिक निर्णय लेने की जरूरत है, ताकि उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में मुकदमों का अंबार न लगे।

पत्र में लिखा गया- 'अगले ही दिन प्रवर्तन निदेशालय ने इस आदेश को माननीय उच्च न्यायालय में चुनौती दी। इस चुनौती को बेहद अनियमित बनाने वाली बात यह है कि यह चुनौती राउज एवेन्यू कोर्ट के आदेश अपलोड होने से पहले ही की गई थी। इससे यह सवाल उठता है कि आदेश अपलोड होने से पहले माननीय न्यायमूर्ति सुधीर कुमार जैन ने उक्त आदेश को चुनौती देने की अनुमति कैसे दी, इसे सूचीबद्ध करने की अनुमति कैसे दी और सबसे चिंताजनक बात यह है कि जमानत बांड के निष्पादन पर रोक लगाने का आदेश दिया। यह सब ऑर्डर अपलोड होने से पहले ही किया गया था। भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में इससे पहले ऐसा कभी नहीं देखा गया और इससे कानूनी बिरादरी के मन में गहरी चिंताएं पैदा हो गई हैं।'

Advertisement

उठाए ये सवाल

पत्र के मुताबिक, माननीय न्यायाधीश सुधीर कुमार जैन को अपने सगे भाई अनुराग जैन, जो वकील प्रवर्तन निदेशालय के वकील हैं, की कार्यवाही से बचना चाहिए था। माननीय न्यायाधीश सुधीर कुमार जैन द्वारा हितों के इस स्पष्ट टकराव की कभी घोषणा नहीं की गई। वास्तव में उन्होंने ऐसे आदेश पारित किए जो स्पष्ट रूप से अनियमित हैं और जिनकी देरी पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी टिप्पणी की है। इतना ही नहीं, कई अधिवक्ताओं ने शिकायत की है कि न्याय बिंदु, एएसजे द्वारा दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के लिए जमानत आदेश पारित किए जाने के तुरंत बाद राउज एवेन्यू कोर्ट के जिला न्यायाधीश द्वारा एक आंतरिक प्रशासनिक आदेश जारी किया गया था जिसमें सभी अवकाश न्यायालयों को निर्देश दिया गया था कि वे ऐसा नहीं करेंगे। किसी भी मामले में अंतिम आदेश देंगे और छुट्टियों के बाद नियमित न्यायालयों के लिए केवल नोटिस जारी करेंगे। ऐसा आदेश न केवल प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक रूप से अनियमित है, बल्कि न्याय का मखौल भी है। अवकाश न्यायालयों का संपूर्ण उद्देश्य यह है कि ऐसे अत्यावश्यक मामले हैं जिन पर अवकाश के दौरान भी ध्यान देने की आवश्यकता है। अगर ऐसा कोई प्रशासनिक आदेश जारी किया जाता है, तो यह अवकाश पीठ रखने के उद्देश्य को ही विफल कर देता है। आदेश के समय पर यह सवाल भी उठा कि क्या इसे राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत देने के बाद पारित किया गया था।

ये भी पढ़ेंः लोन वुल्फ अटैक के जरिए निशाने पर थे कई जवान, खंडवा से इंडियन मुजाहिदीन का आतंकी गिरफ्तार

Advertisement

Published By : Kunal Verma

पब्लिश्ड 4 July 2024 at 21:22 IST