Tamil Nadu Elections 2026: तमिलनाडु चुनाव से पहले मुश्किल में थलपति विजय, अब इस मामले में हुआ केस दर्ज
Tamil Nadu Polls: न्नई के पेरम्बूर स्थित पेरावल्लूर पुलिस स्टेशन में तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) प्रमुख विजय के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
- मनोरंजन समाचार
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Tamil Nadu Polls: तमिल सुपरस्टार थलापति विजय के लिए एक के बाद एक मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। चेन्नई के पेरम्बूर स्थित पेरावल्लूर पुलिस स्टेशन में तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) प्रमुख विजय के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। निगरानी अधिकारी कुमार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने ये एक्शन लिया है।
विजय पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। शिकायत के अनुसार, उनके ऊपर कथित तौर पर 30 लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करके, एम्बुलेंस का रास्ता रोककर, 5000 से ज्यादा लोगों को इकट्ठा करके और जनता को असुविधा पहुंचाकर चुनाव नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगा है।
थलापति विजय के खिलाफ केस दर्ज
सार्वजनिक उपद्रव करना, सार्वजनिक मार्ग को ब्लॉक करना और जानबूझकर गैरकानूनी सभा में भाग लेना सहित पांच धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
विजय के साथ-साथ लगभग 5000 टीवीके कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। यह घटना सोमवार की है जब विजय पेरम्बूर निर्वाचन क्षेत्र से नामांकन दाखिल करने के दौरान रोड शो कर रहे थे। रोड शो देखने के लिए भारी भीड़ जमा हो गई थी। वहीं, टीवीके ने चेन्नई पुलिस पर चुनाव प्रचार के सुचारू संचालन के लिए पुलिस सुरक्षा प्रदान न करने और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित न करने का आरोप लगाया।
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टीवीके की चुनाव आयोग से दखल देने की अपील
बता दें कि टीवीके ने चुनाव आयोग से दखल देने और चेन्नई पुलिस को सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। उसने पोस्ट में लिखा कि कैसे कैंपेन के लिए फॉर्मल परमिशन लेने के बाद भी, जब टीवीके नेता एक प्रचार स्थल से दूसरे प्रचार स्थल जा रहे थे, तब पुलिस सुरक्षा और यातायात नियमों की कमी के कारण एक जगह से दूसरी जगह जाना असंभव हो रहा था।
पार्टी ने आगे आरोप लगाया कि राज्य के अधिकारी, सत्ताधारी डीएमके के साथ मिलीभगत करके टीवीके के चुनाव प्रचार को दबा रहे हैं। पोस्ट में लिखा है- “तमिलनाडु विक्ट्री सोसाइटी के नेता को अनुमति न देना और डीएमके नेता स्टालिन को खुले वाहन से प्रचार करने की एकतरफा अनुमति देना, लोकतंत्र का मजाक उड़ाने जैसा है।”