कंगना थप्पड़ कांड में बहन रंगोली की एंट्री, कहा- बस तुम्हारी यही औकात, पीछे से…
Rangoli on Kangana Ranaut Slap Incident: कंगना रनौत को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर एक CISF महिला जवान ने थप्पड़ मार दिया। इस घटना पर उनकी बहन रंगोली भड़क उठी हैं।
- मनोरंजन समाचार
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Rangoli on Kangana Ranaut Slap Incident: बॉलीवुड एक्ट्रेस और मंडी की सांसद कंगना रनौत को 6 जून को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर एक CISF महिला जवान ने थप्पड़ मार दिया। ये घटना तब की बताई जा रही है जब कंगना दिल्ली जाने के लिए एयरपोर्ट लाउंज में अपनी फ्लाइट का वेट कर रही थीं। अब इस थप्पड़ कांड पर उनकी बहन रंगोली चंदेल का गुस्सा फूट पड़ा है।
ऐसा सामने आया है कि जब कंगना फ्लाइट बोर्ड करने के लिए आगे बढ़ रही थीं तो वहां तैनात CISF जवान कुलविंदर कौर ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। वह कथित तौर पर किसान आंदोलन के दौरान कंगना द्वारा दी गई टिप्पणी से नाराज थी। बाद में एक्ट्रेस ने भी एक वीडियो जारी करते हुए मामले पर रिएक्ट किया और दावा किया कि ना केवल उनके गाल पर मारा गया, बल्कि उन्हें गालियां भी दी गईं।
कंगना रनौत को थप्पड़ पड़ने पर भड़कीं बहन रंगोली
रंगोली ने सोशल मीडिया के जरिए बहन को चांटा पड़ने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने एक के बाद एक धड़ाधड़ कई पोस्ट किए हैं। उन्होंने लिखा- “खालिस्तानियों बस यही औकात है तुम्हारी, पीछे से प्लान करके हमला करना लेकिन मेरी बहन की रीढ़ की हड्डी स्टील की बनी है। वो हैंडल कर लेगी लेकिन पंजाब तेरा क्या होगा। किसान आंदोलन खालिस्तानियों का अड्डा था, फिर से साबित हो गया। ये सुरक्षा में चूक का मामला था, ऊपर तक ले जाना पड़ेगा”।
रंगोली ने आगे CISF जवान को सस्पेंड करने की खबर पर कहा कि ‘इस एक्शन से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उसे खालिस्तानियों से मोटी रकम आ गई होगी, रिमांड पर लेना पड़ेगा उसको’।
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“यूनिफॉर्म में खालिस्तानी”
बता दें कि कुलविंदर का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वो कह रही थीं कि मेरी मां बैठी थी जब कंगना ने वो बयान दिया था। इसी को शेयर करते हुए रंगोली पूछती हैं- “ये बयान कंगना ने खालिस्तानियों के लिए दिया था, तू खालिस्तानी है। लग रहा है तू ही है, भेड़ की खाल में भेड़िया उर्फ यूनिफॉर्म में खालिस्तानी”।
गौरतलब है कि कंगना ने उस समय बयान दिया था कि “100-100 रुपए में किसान आंदोलन में महिलाएं बैठी हैं”। महिला CISF जवान उनके इसी बयान से नाराज थी और दावा किया कि उनकी मां भी उसी किसान आंदोलन में जाती थीं।