रामभक्तों का वध उस नगरी में हुआ जिसे अ'वध' कहा जाता है...अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलावाने वालों को मनोज मुतंशिर ने रिपब्लिक के मंच से लताड़ा
Manoj Muntashir On Ram Mandir: रिपब्लिक भारत के मंच पर मनोज मुंतशिर ने साफतौर से कहा कि राम मंदिर केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि सदियों के संघर्ष और रामभक्तों के खून-पसीने का परिणाम है।
- मनोरंजन समाचार
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Manoj Muntashir On Ram Mandir Theft And Lord Rama History: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रिपब्लिक भारत के मेगा समिट 'मंथन 2026' के इस खास कार्यक्रम की शुरुआत रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने दीप प्रज्वलित कर की। राजनीति से लेकर मनोरंजन जगत की कई दिग्गज हस्तियां इस मंच पर अपने विचार साझा कर रही हैं। इसी बीच मंच पर मशहूर गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर पहुंचे, जहां उन्होंने अयोध्या राम मंदिर में हुई चोरी के विवाद और राम मंदिर के इतिहास पर बेहद भावुक और बेबाक तरीके से अपनी बात रखी।
भगवान राम को क्यों ठहरा रहे हैं कसूरवार?
हाल ही में अयोध्या में हुई चोरी की घटना पर बात करते हुए मनोज मुंतशिर ने लोगों की नाराजगी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक चोरी की वजह से लोग भगवान राम को क्यों कसूरवार ठहरा रहे हैं? क्या सिर्फ इस घटना के कारण लोगों ने अयोध्या जाना छोड़ दिया है?
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा, "सरकार से दरख्वास्त कीजिए कि एक-एक आरोपी को पकड़ा जाए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। लेकिन वहां जाना मत छोड़िए। भगवान राम के पास जाइए, अयोध्या जाइए।" उन्होंने याद दिलाया कि वह स्थान कोई साधारण जगह नहीं है, बल्कि हमारे 500 वर्षों के बलिदान का साक्षी है। एक चोरी की घटना के बाद लोगों का वहां जाना छोड़ देना सही नहीं है।
500 सालों का संघर्ष और आजादी के बाद का दर्द
मुंतशिर ने राम मंदिर के लिए लड़ी गई लंबी कानूनी और ऐतिहासिक लड़ाई का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कोर्ट में यह साबित करने में इतना समय लग गया कि कलयुग से पहले त्रेता युग आया था और बाबर से पहले मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम आए थे।
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उन्होंने आजादी के बाद की सरकारों पर भी निशाना साधा
1950 में देश का संविधान बन गया, सत्ता महलों में राज करती रही, लेकिन भगवान राम को अपनी जन्मभूमि वापस नहीं मिली। इतिहास उठाकर देख लीजिए, दुनिया के किसी भी देश में किसी भी व्यक्ति की आस्था के साथ ऐसा खिलवाड़ नहीं किया गया जैसा रामभक्तों के साथ हुआ।
'अवध' में हुआ रामभक्तों का वध
कारसेवकों पर चली गोली की घटना को याद करते हुए मनोज मुंतशिर भावुक हो गए। उन्होंने रिपब्लिक के मंच से उन लोगों को आड़े हाथों लिया जिन्होंने अयोध्या में गोलियां चलवाई थीं। उन्होंने कहा, "रामभक्तों की हत्या उस नगरी में हुई जिसे अ'वध' कहा जाता है।"
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उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या हम ये सब भूल जाएंगे? भगवान राम के साथ जो हुआ, अपना राम मंदिर पाने के लिए जो बलिदान और संघर्ष हुए, क्या उन्हें भुला दिया जाएगा? मरते-मरते उन रामभक्तों के होठों पर 'राम-राम' था, और आज सिर्फ एक घटना के कारण लोगों ने वहां जाना ही छोड़ दिया?
मनोज मुंतशिर का यह संबोधन सीधे तौर पर उन लोगों के लिए एक संदेश था जो हालिया विवादों के कारण अयोध्या से दूरी बना रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि राम मंदिर केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि सदियों के संघर्ष और रामभक्तों के खून-पसीने का परिणाम है।