'12 मन सूखी लकड़ी ही मेरी कुल प्रॉपर्टी है, मरने पर बस उसी में जला देना...', जब नाना पाटेकर ने कही थी दिल पसीज देने वाली बात- VIDEO
अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद अब उनके पुराने बयान और वीडियोज चर्चाओं में हैं। ऐसा ही एक बयान उनका चर्चा में है जिसने सभी को भावुक कर दिया है।
- मनोरंजन समाचार
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अपनी बेबाक अदाकारी और जीवंत अभिनय के लिए मशहूर दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर हमेशा से अपने सादगी भरे जीवन और अलग सोच के लिए जाने जाते रहे हैं। मृत्यु और जीवन के दर्शन पर उनके विचार हमेशा से समाज को सोचने पर मजबूर करते आए हैं। एक पुराने साक्षात्कार में उन्होंने अपनी अंतिम यात्रा और जीवन की नश्वरता को लेकर कुछ ऐसी बातें कही थीं, जो आज भी लोगों को झकझोर कर रख देती हैं।
अंतिम संस्कार के लिए खुद जुटाई थी लकड़ियां
नाना पाटेकर ने एक बातचीत के दौरान खुलासा किया था कि उन्होंने अपने अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां पहले से ही संग्रह करके रखी हुई थीं। उनका मानना था कि इंसान चाहे जीवन में कितना भी कमा ले, लेकिन अंत समय में उसकी असली संपत्ति वही 12 मन लकड़ी होती है, जो उसकी चिता में काम आती है। उन्होंने कहा था कि अंतिम समय में उनके पास बस यही संपत्ति रहेगी।
'मुझे गीली लकड़ियों पर मत जलाना'
साक्षात्कार में नाना पाटेकर ने एक बेहद अनूठी और भावुक इच्छा जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें अंतिम संस्कार के समय गीली लकड़ियों पर न जलाया जाए। जब उनसे इसका कारण पूछा गया, तो उनका जवाब इंसानियत और दुनिया के दिखावे पर गहरा कटाक्ष था। नाना ने कहा था कि गीली लकड़ियां जलने पर जो धुआं उठेगा, उससे वहां मौजूद सभी लोगों की आंखों में आंसू आ जाएंगे। ऐसे में यह पहचानना मुश्किल हो जाएगा कि कौन सच में उनके जाने के शोक में रो रहा है और कौन सिर्फ दिखावा कर रहा है। वे अपनी जिंदगी में किसी भी तरह के बनावटीपन को पसंद नहीं करते थे।
तस्वीर न लगाने का सख्त निर्देश
नाना पाटेकर का मानना था कि दुनिया में असली और नकली का फर्क करना बहुत मुश्किल हो गया है। उन्होंने अपने परिवार को स्पष्ट निर्देश दिया था कि उनकी मृत्यु के बाद घर में उनकी कोई तस्वीर न लगाई जाए। उनका कहना था कि दुनिया में किसी के जाने के दो-चार दिन बाद कोई किसी को याद नहीं रखता, इसलिए वे अपनी मृत्यु को भी बिना किसी आडंबर के बेहद साधारण रखना चाहते थे।